Bhupen Kumar Bora resignation Assam Congress: असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को करारा झटका लगा है दरअसल असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस्तीफा भेज दिया. बाद में उन्होंने मीडिया से इसकी पुष्टि की और कहा कि सही समय आने पर इस्तीफे की वजह बताएंगे. सूत्रों के हवाले से बताया गया कि बोरा ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें पार्टी नेतृत्व द्वारा अनदेखा किया जा रहा था और राज्य इकाई में उनका सम्मान नहीं हो रहा था. जैसे ही बोरा के इस्तीफे की खबर फैली, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें ‘असम कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता’ करार देते हुए कहा कि वह मंगलवार शाम उनके घर जाएंगे.
हिमंता ने तंज कसते हुए क्या कहा?
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरा के इस्तीफे पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि “तीन साल पहले हम भूपेन बोरा का स्वागत करने और उन्हें सुरक्षित सीट देने के लिए तैयार थे. ” सरमा ने यह भी कहा कि बोरा अब असम कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता थे. उनका यह बयान असम की सियासत में तूफान ला सकता है. हिमंता ने बोरा के इस्तीफे को कांग्रेस की हिंदू विरोधी छवि का प्रमाण बताया और कहा कि पार्टी अब पूरी तरह मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर हो गई है.
#WATCH गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम कांग्रेस के पूर्व प्रमुख भूपेन कुमार बोरा पर कहा, “वे कांग्रेस पार्टी में बिना किसी पारिवारिक बैकग्राउंड वाले आखिरी हिंदू थे…भूपेन कुमार बोरा असम कांग्रेस में आखिरी ऐसे व्यक्ति थे… उनके इस्तीफे का एक सांकेतिक संदेश… pic.twitter.com/ZVF9zJHXYC
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 16, 2026
कौन हैं भूपेन कुमार बोरा?
बता दें कि भूपेन कुमार बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे. दो बार विधायक रह चुके बोरा ने गुवाहाटी में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने सुबह 8 बजे पार्टी हाईकमान को ईमेल से इस्तीफा भेजा और उसमें अपने फैसले की वजहें विस्तार से लिखीं. उन्होंने कहा कि मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता. उचित समय पर मीडिया को बुलाकर सारी जानकारी दूंगा. मैं कुछ छुपाता नहीं हूं और कोई भी कदम गुपचुप नहीं उठाऊंगा. इस्तीफे की खबरों के बीच असम के कई विपक्षी नेता उनके घर पहुंचे. बोरा ने बताया कि अखिल गो समेत कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया है.
भूपेन कुमार बोरा ने क्यों इस्तीफा दिया?
असम कांग्रेस के अंदर मतभेद की शुरुआत लगभग एक साल पहले मानी जाती है, जब पार्टी की कमान राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले गौरव गोगोई को सौंपी गई. कांग्रेस हाईकमान के भीतर यह धारणा थी कि भूपेन कुमार बोरा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अपने चरम पर पहुंच चुके हैं. पार्टी किसी ऐसे बड़े कद के नेता की तलाश में थी, जो हिमंत बिस्वा सरमा को सीधे चुनौती दे सके. हालांकि, इस फैसले से पार्टी के अंदर शंका और असंतोष पैदा हुआ, क्योंकि बीजेपी से लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद जमीनी स्तर पर कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने का काम बोरा ने ही किया था. बोरा के इस्तीफे से असम कांग्रेस में बड़ा संकट पैदा हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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