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प्रचार से दूर तेजस्वी यादव, डेब्यूटेंट का अखाड़ा बना बांकीपुर; किसकी होगी मौज?

Bankipur Assembly By Election: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव ‘डेब्यूटेंट’ उम्मीदवारों का अखाड़ा बन चुका है. प्रशांत किशोर और अभिषेक कुमार के पहले चुनावी डेब्यू के बीच आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव यूरोप दौरे पर हैं. जानिए इसमें किसकी मौज होने वाली है?

Bankipur By Election Tejashwi Yadav Prashant Kishor Abhishek Kumar Weena Manvi

Bankipur Assembly By Election: बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल और प्रबुद्ध मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस बार बेहद अनूठा और दिलचस्प मोड़ ले चुका है. आमतौर पर बिहार की राजनीति में जहां दशकों पुराने चेहरों और सधे हुए सूरमाओं के बीच शह-मात का खेल होता है. बांकीपुर की धरती ‘डेब्यूटेंट’ समर में उतर रहे नए खिलाड़ियों की प्रयोगशाला बन गई है. नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर चुनावी बिसात कुछ ऐसी बिछी है कि मुख्य चार उम्मीदवारों में से तीन प्रत्याशी अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ रहे हैं.

लेकिन इस पूरे चुनावी दंगल के बीच सबसे बड़ा कौतूहल और चर्चा का विषय राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव की रहस्यमयी दूरी बनी हुई है. आइए विस्तार से समझते हैं कि पहली बार लड़ रहे इन दिग्गजों के अखाड़े में किसका पलड़ा भारी है और तेजस्वी आखिर क्यों इस हाई-प्रोफाइल जंग से दूर विदेश में समय बिता रहे हैं.

डेब्यूटेंट का अखाड़ा बना बांकीपुर (Debut In Bankipur Assembly By Election)

प्रशांत किशोर (PK) का पहला दांव: देश भर में कई मुख्यमंत्रियों और पार्टियों को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने वाले चाणक्य प्रशांत किशोर इस बार पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि खुद ‘जन सुराज’ दल के बैनर तले अपनी जिंदगी का पहला चुनाव लड़ रहे हैं. घर-घर जाकर वोट मांग रहे पीके के लिए यह उनकी साख की सबसे बड़ी परीक्षा है.

बीजेपी के युवा चेहरे अभिषेक कुमार: नितिन नवीन के करीबी और कायस्थ समुदाय से आने वाले अभिषेक कुमार भी पहली बार चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं. उन्हें एनडीए (NDA) और जेडीयू का पूर्ण समर्थन हासिल है, और उनके कंधों पर बीजेपी के इस अभेद्य किले को बचाने की बड़ी जिम्मेदारी है.

तेज प्रताप के भरोसे वीना मानवी: पुरुष अधिकार संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेबाक सामाजिक कार्यकर्ता वीना मानवी भी अपना पहला चुनाव लड़ रही हैं. वे लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ (JJD) के टिकट पर दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगाने उतरी हैं.

राखी गुप्ता की ‘सेकंड पारी’: इस पूरे अखाड़े में पटना की पूर्व मेयर राखी गुप्ता (RJD उम्मीदवार) इकलौती ऐसी खिलाड़ी हैं जो दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं. साल 2025 के चुनाव में वे 46,363 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रही थीं. इस बार वे मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण के साथ वैश्य मतों को जोड़ने में जुटी हैं.

चुनावी शोर से दूर क्यों हैं तेजस्वी यादव? (Tejashwi Yadav During Bankipur Election)

जब पटना की सड़कों पर बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है, तब आरजेडी के सेनापति तेजस्वी यादव मोर्चे पर गायब हैं. तेजस्वी यादव ऐन चुनाव के वक्त 10 दिनों के पूर्व निर्धारित यूरोप दौरे पर निकल गए हैं. इस वजह से विरोधी दल उन पर ‘लापता’ होने के तंज कस रहे हैं. यहाँ तक कि पार्टी का 30वां स्थापना दिवस भी 5 जुलाई के बजाय 1 जुलाई को ही आनन-फानन में मना लिया गया.

राखी गुप्ता को टिकट दिए जाने से पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे सांसद सुरेंद्र यादव और भाई वीरेंद्र बेहद नाराज हैं और सार्वजनिक रूप से बयानबाजी कर रहे हैं. उधर लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी सारण के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव के निष्कासन पर सुनील सिंह और संजय यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. नालंदा में स्थापना दिवस के मंच पर प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव और कल्लू मुखिया के बीच हुई मारपीट का वीडियो भी वायरल हो चुका है.

कांग्रेस की नाराजगी और PK का डर (Bankipur Election Update)

आरजेडी ने गठबंधन धर्म को दरकिनार कर कांग्रेस के प्रभाव वाली इस सीट पर एकतरफा उम्मीदवार घोषित कर दिया, जिससे कांग्रेस नाराज है. इसके अलावा, तेजस्वी इस असमंजस में हैं कि यदि वे मैदान में उतरते हैं, तो उनका सीधा मुकाबला प्रशांत किशोर से होगा, जहां हार या जीत दोनों ही स्थितियों में उनका राजनीतिक वजूद सीधे प्रभावित हो सकता है.

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बांकीपुर का चुनावी गणित: किसकी होगी मौज? (Who Will Win Bankipur)

बांकीपुर में पढ़े-लिखे मतदाता रहते हैं जो उम्मीदवार के विजन और काबिलियत को तवज्जो देते हैं. यहां कायस्थ, सवर्ण और व्यापारी (वैश्य) वर्ग के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं. तीनों नए उम्मीदवार (अभिषेक, पीके और वीना) जहां इसी पारंपरिक शहरी वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, वहीं आरजेडी की राखी गुप्ता विपक्ष के वोटों के बिखराव और अपने पुराने प्रशासनिक अनुभव के भरोसे किला फतह करने की ताक में हैं. तेजस्वी की अनुपस्थिति और तीन नए चेहरों के इस त्रिकोणीय व चतुष्कोणीय मुकाबले में बांकीपुर का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होने वाला है.



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