बिहार में सड़क, खेती, रोजगार, पशुपालन, सहकारिता और तकनीक के क्षेत्र में काम तेज करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. बैठक में लिए गए फैसलों का सीधा असर सड़क कनेक्टिविटी से लेकर किसानों की सिंचाई सुविधा, दूध उत्पादन, रोजगार व्यवस्था और नई तकनीक के इस्तेमाल तक देखने को मिल सकता है.
कैबिनेट के फैसलों में सबसे बड़ी परियोजनाओं में बक्सर-भागलपुर छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शामिल है. इसके अलावा किसानों के लिए नए निजी नलकूप लगाने, पशुओं की नस्ल सुधारने और राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया हैं.
बक्सर से भागलपुर तक बनेगा छह लेन एक्सप्रेसवे
पथ निर्माण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरकार ने करीब 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. यह पूरी तरह नियंत्रित एक्सेस वाला एक्सप्रेसवे होगा. परियोजना को पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के डीबीएफओटी टोल मॉडल पर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के जरिए लागू किया जाएगा.
सरकार ने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार कराने के साथ ट्रांजैक्शन एडवाइजर की सेवाएं लेने की भी मंजूरी दी है. एक्सप्रेसवे के आसपास उपलब्ध बड़े भू-खंडों को आर्थिक गतिविधियों के लिए विकसित करने की दिशा में भी बीएसआरडीसीएल को अधिकार दिया गया है. माना जा रहा है कि इस परियोजना से बिहार के कई हिस्सों में आवागमन आसान होने के साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल संसाधन विभाग के दो प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. नरपतगंज क्षेत्र की जानकीनगर शाखा नहर और उससे जुड़ी नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन के लिए 30.35 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और व्यय स्वीकृति दी गई है.
इसके साथ ही कटिहार वितरणी, फूलपुर, हसनगंज, बैजनाथपुर और सेमापुर उप-वितरणियों सहित संबंधित नहर प्रणालियों को दुरुस्त करने के लिए 35.81 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इन कामों का मकसद सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों तक पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाना है.
किसानों के लिए 1,000 नए निजी नलकूप
सरकार ने ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना में भी विस्तार किया है. पहले से स्वीकृत 35 हजार नलकूपों के अलावा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,000 नए निजी नलकूप लगाए जाएंगे. इसके लिए 83.60 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है.
खेती के लिए सिंचाई की सुविधा बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. नए नलकूपों से उन किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में परेशानी होती है.
दूध उत्पादन और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने हरी झंडी दी. सात निश्चय-3 के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘नस्ल सुधार योजना’ लागू की जाएगी. कॉम्फेड, पटना के जरिए चलने वाली इस योजना पर करीब 63.93 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुओं की उत्पादकता में सुधार करना है. इससे डेयरी से जुड़े किसानों और पशुपालकों को लंबे समय में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
रोजगार व्यवस्था से जुड़े एक फैसले में पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, गयाजी, छपरा, भागलपुर और रोहतास के क्षेत्रीय नियोजनालयों का नाम बदलकर संबंधित जिला नियोजनालय करने की मंजूरी दी गई है. नाम में यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था को जिलास्तर पर अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में देखा जा रहा है.
इसके अलावा कजरा सोलर पावर परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के लीज दस्तावेजों के पंजीकरण पर लगने वाले मुद्रांक शुल्क और निबंधन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का फैसला भी किया गया है.
बिहार में AI के लिए बनेगा नया इकोसिस्टम
तकनीक के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने बड़ा कदम उठाया है. बिहार सरकार और टायो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इकोसिस्टम विकसित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी दी गई है.
सरकार की कोशिश है कि राज्य में AI से जुड़ी तकनीक, कौशल और संभावित नए अवसरों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जाए. आने वाले समय में इसका इस्तेमाल सरकारी सेवाओं और दूसरे क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है.
गोदामों और सहकारी समितियों को भी बढ़ावा
सहकारिता विभाग के कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. चीनी मिलों के अधिसूचित आरक्षित क्षेत्रों में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियां बनाने की अनुमति दी गई है. इसके अलावा वर्ष 2026-27 में 48,200 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना को भी स्वीकृति मिली है.
इस योजना के तहत 200, 500 और 1,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जाएंगे. इसके लिए करीब 34.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. राज्य में मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के गठन को भी मंजूरी दी गई है, जिससे मछली पालन से जुड़े लोगों को संगठित सहकारी व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जाएगी.
कैबिनेट ने बिहार पंचायत राज वित्त निगम लिमिटेड के परिसमापन की कार्रवाई को भी मंजूरी दी. इसके साथ बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नियमावली-2024 में संशोधन कर नए नियम जोड़ने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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