Amit Malviya Target Congress: चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैचलेट को बुधवार को नई दिल्ली में इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार सौंपा. समारोह को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने बैचलेट के असाधारण जीवन और संघर्ष की सराहना की. हालांकि, कांग्रेस अपने इस फैसले के बाद निशाने पर आ गई है. भाजपा कांग्रेस के इस फैसले की घोर आलोचना कर ही है. आइये जानें आखिर मिशेल बैचलेट के शांति पुरस्कार पर घमासान क्यों मचा है?
बता दें बचपन में ही बैचलेट को तानाशाही के दौरान उत्पीड़न, यातना और निर्वासन का दंश झेलना पड़ा था. इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने न सिर्फ चिली बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका की पहली महिला रक्षा मंत्री बनकर इतिहास रचा, बल्कि दो बार अपने देश की राष्ट्रपति भी चुनी गईं.
शांति पुरस्कार पर घमासान
मिशेल बैचलेट को कांग्रेस द्वारा इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने को लेकर बवाल भी मचने लगा है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने की कड़ी निंदा की है. उन्होंने अपने बातों के आधार के लिए लंबा लेख लिखकर पोस्ट किया है. मालवीय के मुताबिक, बैचलेट का पूरा ट्रैक रिकॉर्ड ग्लोबल लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम के साथ पूरी तरह से मेल खाता है, जिसे कांग्रेस बिना हिचक अपनाती रही है. अमित मालवीय ने लिखा-
बैचलेट ने अपना कार्यकाल साफ तौर पर भारत-विरोधी, इस्लाम-समर्थक कहानी पर बनाया, जो ग्लोबल लेफ़्ट-लिबरल इकोसिस्टम से पूरी तरह मेल खाती थी. जाहिर है, कांग्रेस ने उन्हें मनाने की जल्दी की. बैचलेट अपनी सोच का बोझ UN में भी ले गईं, जहां उन्होंने रेगुलर तौर पर ‘माइनॉरिटी राइट्स’ और ‘फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच’ की आड़ में भारत को निशाना बनाया. ये भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए आसान कवर बन गईं.
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Congress और राहुल गांधी पर निशाना
इतना ही नहीं मालवीय ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए लिखा कि मिशेल बैचलेट कांग्रेस के प्रोपेगैंडा टेम्पलेट में अच्छी तरह से फिट बैठती है. एक ऐसी पार्टी के लिए जिसे भारतीय वोटरों ने रिजेक्ट कर दिया है और किनारे कर दिया है, उन लोगों के बीच आराम ढूंढना बिल्कुल सही है जो भारत के हितों के प्रति उसके बायस और दुश्मनी को शेयर करते हैं. राहुल गांधी और उनके ग्रुप को बस विदेश में आइडियोलॉजिकल साथी मिल गए हैं. उन्हें गुड लक क्योंकि देश साफ तौर पर आगे बढ़ चुका है.
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