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Blast Incidents : लाल किले के पास धमाका, जानिए 1996 से 2025 तक ब्लास्ट की दिल्ली में घटनाएं.

Blast Incidents :1996 से 2025 तक, हर दशक में हुए इन विस्फोटों ने साबित किया है कि आतंक की जड़ें अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं

Blast Incidents

Blast Incidents

Blast Incidents : राजधानी दिल्ली सोमवार को एक बार फिर धमाके से दहल उठी. ऐतिहासिक लाल किला एक बार फिर आतंक का निशाना बना. गेट नंबर-1 के बाहर खड़ी एक कार में हुए भीषण विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं. शुरुआती जांच में विस्फोटक के प्रकार का पता नहीं चल सका है, लेकिन एनआईए, दिल्ली पुलिस और एनएसजी की टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं.

दिल्ली में कब कब हुए Blast Incidents

यह हादसा उन काले दिनों की याद दिलाता है जब दिल्ली बार-बार आतंकी हमलों की चपेट में आई. 1996 से लेकर अब तक देश की राजधानी कई बार दहली है, कभी बाजारों में, कभी सिनेमा हॉलों में, तो कभी अदालतों के बाहर. आइए जानते हैं, कब-कब दिल्ली आतंक के साए में थर्राई.

1996: लाजपत नगर ब्लास्ट में 16 की मौत

21 मई 1996 को दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में हुए बम धमाके ने पूरे देश को झकझोर दिया था. उस धमाके में 16 लोगों की मौत हुई थी और करीब 40 लोग घायल हुए। यह दिल्ली का पहला बड़ा आतंकी हमला था, जिसने राजधानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए.

1997 में हुए कई Blast Incidents

1997 दिल्ली के लिए डर का साल साबित हुआ. 9 जनवरी को आईटीओ के पास पुराने पुलिस मुख्यालय के निकट विस्फोट में कई लोग घायल हुए. 18 अक्टूबर को रानी बाग मार्केट में दो धमाकों में एक व्यक्ति की मौत हुई. 26 अक्टूबर को करोल बाग में दो धमाकों में एक की मौत और 34 घायल हुए. 30 नवंबर को लाल किले के पास हुए डबल ब्लास्ट में तीन लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल हुए. इन Blast Incidents ने राजधानी को असुरक्षा की गहरी चादर में लपेट दिया.

1998 से 2000 तक आतंकी घटनाएं

26 जुलाई 1998 को कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर बस में हुए धमाके में दो लोगों की मौत हुई.
फिर 18 जून 2000 को लाल किले के पास हुए विस्फोट में एक आठ साल की बच्ची सहित दो लोगों की जान चली गई.

2005 में त्योहारों से पहले Blast Incidents

22 मई 2005 को साउथ दिल्ली के सत्या सिनेमा और लिबर्टी हॉल के पास धमाके हुए, जिनमें दो लोग मारे गए.
लेकिन इसी साल 29 अक्टूबर, दिवाली से ठीक पहले, सरोजिनी नगर, गोविंदपुरी और पहाड़गंज में सिलसिलेवार धमाकों ने 60 लोगों की जान ले ली और 100 से अधिक घायल हुए. यह हमला अब तक का सबसे भीषण आतंकी हमला माना जाता है जिसने पूरे देश को हिला दिया था.

2006 से 2008 तक लगातार आतंकी वारदातें

14 अप्रैल 2006 को जामा मस्जिद के पास दो धमाके हुए जिनमें कई लोग घायल हुए.
इसके बाद 13 सितंबर 2008 को कनॉट प्लेस, करोल बाग और ग्रेटर कैलाश में सिलसिलेवार धमाकों में 24 लोगों की मौत और 100 से अधिक घायल हुए.
इसी साल 27 सितंबर 2008 को महरौली फ्लावर मार्केट में धमाके में तीन लोगों की जान गई.

2011 में दिल्ली हाईकोर्ट बना निशाना

25 मई 2011 को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर कार ब्लास्ट हुआ, जिसमें सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ.
लेकिन कुछ ही महीने बाद, 7 सितंबर 2011 को हाईकोर्ट गेट नंबर-5 पर सूटकेस में रखे बम के धमाके में 17 लोगों की मौत और 76 लोग घायल हो गए. यह हमला देश की न्यायपालिका की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न छोड़ गया.

2025 में फिर गूंजी धमाके की आवाज

अब नवंबर 2025, एक बार फिर दिल्ली आतंक की चपेट में है.
लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी कार में हुए धमाके ने आठ लोगों की जान ले ली. इलाके में भगदड़ मच गई और पूरी जगह को सील कर दिया गया है. शुरुआती जांच में विस्फोटक की प्रकृति का पता नहीं चल सका है. एनआईए और एनएसजी की टीमें फोरेंसिक जांच में जुटी हैं.

कब तक होती रहेंगी धमाके की घटनाएं

तकनीकी प्रगति, सुरक्षा जांच और खुफिया एजेंसियों की सख्ती के बावजूद दिल्ली जैसे हाई-प्रोफाइल शहर में इस तरह के धमाके होना चिंता का विषय है.
1996 से 2025 तक, हर दशक में हुए इन विस्फोटों ने साबित किया है कि आतंक की जड़ें अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.
राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अब फिर से गंभीर मंथन का समय है.

भारत एक्सप्रेस



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