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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे टोल एग्रीमेंट में बड़ा खुलासा: ₹100 के स्टांप पर 333 करोड़ का अनुबंध, 13 करोड़ की स्टांप चोरी का आरोप

Bundelkhand Expressway Toll Scam: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल संचालन एग्रीमेंट में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जहां 333 करोड़ रुपये के अनुबंध को महज ₹100 के स्टांप पर तैयार किया गया. स्टांप एवं निबंधन विभाग की जांच में 13.34 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी गई है.

Bundelkhand Expressway toll scam

Bundelkhand Expressway toll scam

Bundelkhand Expressway toll scam: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल संचालन एग्रीमेंट में भारी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. स्टांप एवं निबंधन विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि यूपी एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) और टोल ठेकेदार कंपनी के बीच करोड़ों रुपये के अनुबंध को महज 100 रु के स्टांप पेपर पर निष्पादित किया गया. इस मामले ने राजस्व विभाग में हड़कंप मचा दिया है और संबंधित पक्षों के खिलाफ स्टांप चोरी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

भारी स्टांप शुल्क चोरी

जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2024 को यूपीडा और दातार सिक्योरिटी सर्विस ग्रुप इन कंसोर्टियम विद मेसर्स श्री साई इंटरप्राइजेज के बीच बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर टोल संचालन का अनुबंध हुआ था. यह अनुबंध दो वर्षों के लिए 333 करोड़ 65 लाख रुपये के टोल कलेक्शन से जुड़ा था, लेकिन इसे केवल ₹100 के स्टांप पर तैयार किया गया. नियमानुसार इतने बड़े वित्तीय अनुबंध पर निर्धारित स्टांप शुल्क लागू होना चाहिए था, लेकिन इसकी अनदेखी करते हुए भारी स्टांप शुल्क चोरी की गई.

13 करोड़ की स्टांप चोरी का आरोप

जांच में सामने आया है कि इस प्रक्रिया के जरिए सरकार को लगभग 13 करोड़ 34 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. मामला सामने आने के बाद स्टांप एवं निबंधन विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए वाद दर्ज कर दिया है और अन्य बड़े अनुबंधों की भी जांच शुरू कर दी गई है.

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वास्तविक वित्तीय क्षमता के अनुरूप स्टांप शुल्क जमा नहीं

चित्रकूट धाम मंडल के डीआईजी (स्टांप) रईस अहमद खान के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि अनुबंध की वास्तविक वित्तीय क्षमता के अनुरूप स्टांप शुल्क जमा नहीं किया गया. उन्होंने बताया कि भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत यह गंभीर उल्लंघन है और संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार वसूली और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस खुलासे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े अनुबंध में स्टांप शुल्क की अनदेखी कैसे हुई. फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य टोल एवं बड़े सरकारी अनुबंधों की भी जांच के आदेश दिए गए हैं.

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