फाइल फोटो
नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ जन-आंदोलन अब अपनी सबसे बड़ी जीत की ओर बढ़ता दिख रहा है. पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की दूसरी सबसे बड़ी मांग के आगे भी सरकार झुकती नजर आ रही है. CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास (Saurav Das) ने देर रात 1 बजे एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार युवाओं को रिहा करने पर पूरी तरह राजी हो गई है.
देर रात 2 घंटे चली ‘सीक्रेट वार्ता’
सौरव दास के मुताबिक, CJP की शाम की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली पुलिस और सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की. करीब 2 से 3 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में अधिकारियों ने बिहार और असम सरकार द्वारा जारी उन नोटिफिकेशन की कॉपियां सौंपी, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR रद्द करने, कारण बताओ नोटिस वापस लेने और भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी दी गई है. केंद्र सरकार और अन्य एनडीए शासित राज्यों की तरफ से भी मंगलवार तक ऐसा ही आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करने का लिखित वादा किया गया है.
कपिल सिब्बल ने दिए 1 करोड़
आंदोलनकारी छात्रों को एक और बड़ी मजबूती तब मिली जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने पुलिसिया कार्रवाई का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए CJP को 1 करोड़ रुपये का फंड देने का ऐलान किया. CJP की लीगल डिपार्टमेंट हेड रत्ना सिंह और अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी शहर में प्रदर्शन करने वाले छात्र को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और उन्हें पूरी कानूनी सहायता दी जा रही है.
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क्या मान ली गईं CJP की तीनों शर्तें?
CJP ने आंदोलन खत्म करने से पहले सरकार के सामने 3 मुख्य शर्तें रखी थीं.
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा (जो हो चुका है)
- सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR की बिना शर्त वापसी
- पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा
बिहार सरकार ने पहले ही 26 जुलाई से पहले के सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार लोगों को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है. अब पूरे देश की नजरें मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी होने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन पर टिकी हैं.
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