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Arunachal Pradesh: तवांग में नालंदा बौद्ध धर्म पर सम्मेलन में 600 से अधिक प्रतिनिधि हुए शामिल, CM पेमा खांडू ने भी की शिरकत

Arunachal Pradesh: बौद्ध धर्म के इस अवसर पर सीएम पेमा खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक अलग-अलग धर्मों वाला एक विविधतापूर्ण राज्य है.

Arunanchal Pradesh

नालंदा बौद्ध धर्म को लेकर हुआ संवाद (फोटो ट्विटर)

Arunachal Pradesh: अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने नालंदा बौद्ध धर्म सम्मेलन में भाग लिया. जहां बौद्ध धर्म के बारे में चर्चा की गई. इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (CM Pema Khandu ) ने भी हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम का शीर्षक था “नालंदा बौद्ध धर्म – आचार्यों के नक्शे कदम पर स्रोत का पता लगाना: नालंदा से हिमालय और परे.”

नालंदा बौद्ध धर्म की उत्पत्ति भारत के नालंदा मठवासी विश्वविद्यालय में हुई है और यह उत्तरी भारत, भूटान और तिब्बती प्रभाव वाले क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में फैल गया. रिपोर्ट के अनुसार, इस सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्र के अंदर लोगों और धर्मों के बीच संबंधों का जश्न मनाना था.

दलाई लामा ने 1959 में भारत में प्रवेश किया था

इस अवसर पर सीएम पेमा खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक अलग-अलग धर्मों वाला एक विविधतापूर्ण राज्य है. उन्होंने सभी धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए इसे जरुरी बताया. उन्होंने सम्मेलन के स्थान के महत्व पर जोर दिया और आगे कहा कि ज़ेमिथांग अंतिम भारतीय सीमा है जिसके माध्यम से 14वें दलाई लामा ने 1959 में भारत में प्रवेश किया था. खांडू ने नालंदा बौद्ध धर्म के केंद्र में तर्क और विश्लेषण अवधारणाओं की प्रशंसा की. उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा बौद्ध धर्म अनुयायियों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर भी सवाल उठाने की अनुमति देता है.

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‘बौद्ध धर्म के सामने आने वाली चुनौतियों से सतर्क रहना है’

सीएम खांडू ने अपने संबोधन में धार्मिक उत्साह के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए अरुणाचल प्रदेश के लोगों की प्रशंसा की. इसके अलावा उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से 21वीं सदी में बौद्ध धर्म के सामने आने वाली चुनौतियों से सतर्क रहने के लिए कहा है. इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन हिमालयन काउंसिल ऑफ नालंदा बुद्धिस्ट ट्रेडिशन (IHCNBT) द्वारा किया गया था. सम्मेलन में प्रार्थना, धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के भाषण, नालंदा आचार्यों की यात्रा और विचारों के बारे में शिक्षा, नालंदा बौद्ध धर्म के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों पर चर्चा और सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल थे.

वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन दिल्ली में हुआ था आयोजित

पिछले हफ्ते, वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था. दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी 20-21 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय द्वारा की गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को दिल्ली में वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया था. उस दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि “भारत ने बुद्ध की शिक्षाओं का पालन किया है जिसमें सिद्धांत, अभ्यास और प्राप्ति का मार्ग शामिल है. इन तीनों बिंदुओं पर भारत तेजी से आगे बढ़ा है. उन्होंने आगे कहा कि “भारत ‘अमृत काल’ में एक विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. भारत ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए संकल्प लिया है.”

– भारत एक्सप्रेस



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