मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट हमेशा से खास रहा है. यह सीट सिर्फ एक सामान्य विधानसभा क्षेत्र नहीं मानी जाती, बल्कि लंबे समय से यहां की राजनीति प्रदेश की सत्ता के समीकरणों से जुड़ी रही है. ऐसे में आगामी उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार चयन कई लोगों के लिए हैरान करने वाला फैसला बन गया है.
बीजेपी ने दतिया सीट से पूर्व संभागीय संगठन मंत्री और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है. खास बात यह है कि इस सीट पर लगातार सक्रिय नजर आ रहे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी को पार्टी ने इस बार आगे नहीं बढ़ाया. चुनावी तैयारियों में जुटे नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बदला गया चेहरा?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी ने यह फैसला अचानक नहीं लिया, बल्कि लंबे मंथन और जमीनी फीडबैक के बाद उम्मीदवार बदला गया है. सूत्रों की मानें तो पार्टी की एक केंद्रीय सर्वे टीम पिछले कुछ समय से दतिया क्षेत्र में लोगों के बीच जाकर माहौल को समझ रही थी.
कहा जा रहा है कि इस सर्वे में क्षेत्र की जनता के बीच कुछ नाराजगी और बदलाव की मांग सामने आई थी. इसी फीडबैक के बाद पार्टी नेतृत्व ने नए चेहरे पर भरोसा जताने का फैसला किया. हालांकि, टिकट की घोषणा से पहले तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा दतिया में लगातार सक्रिय थे. वे सामाजिक संगठनों और अलग-अलग वर्गों के लोगों से मुलाकात कर रहे थे और चुनावी माहौल बनाने में जुटे थे.

क्यों खाली हुई दतिया विधानसभा सीट?
दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद बनी है. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था. यह जीत कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई थी.
इसके बाद एक पुराने कोऑपरेटिव बैंक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली की अदालत ने राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई. कानून के प्रावधानों के तहत सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई, जिसके कारण दतिया में दोबारा चुनाव की जरूरत पड़ी.
दतिया पिछले कई वर्षों तक बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है. डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यहां लगातार तीन बार जीत दर्ज कर पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था. करीब डेढ़ दशक तक उनका क्षेत्र में खासा प्रभाव रहा.
अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने की है. पार्टी ने आशुतोष तिवारी जैसे स्थानीय और पुराने संगठन से जुड़े चेहरे पर भरोसा जताकर नई रणनीति अपनाई है. वहीं कांग्रेस के सामने अपनी पिछली जीत को बरकरार रखने की चुनौती होगी.
दतिया का यह उपचुनाव अब सिर्फ विधायक चुनने की प्रक्रिया नहीं रह गया है. यह बीजेपी की पुरानी पकड़, कांग्रेस की नई ताकत और स्थानीय नेताओं की राजनीतिक साख की परीक्षा बन चुका है. चुनावी मुकाबला जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, यहां की सियासी हलचल और तेज होने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें: बारिश के गंदे पानी में धोई चाय की केतली! Video देख भड़के लोग; फूटा गुस्सा
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



