Bharat Express DD Free Dish

भगवान के वस्त्रों का नहीं होगा अपमान! दिल्ली की ‘सम्पूर्णा’ ने बनाए सुंदर बैग और पर्स; जानिए क्या है मिशन?

Delhi News: दिल्ली की ‘सम्पूर्णा’ संस्था भगवान के पुराने कपड़ों को फिर से इस्तेमाल कर उन्हें पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में बदलकर धर्म का सम्मान कर रही है और साथ ही जल संरक्षण के लिए भी काम कर रही है.

Positive Story Of Delhi Based Sampoorna NGO

'सम्पूर्णा' की सराहनीय पहल

Delhi News: भारत हिंदू सनातनियों का देश है. यहां हर मौके पर भगवान की पूजा की जाती है. ईश्वर को हमारे धर्म में मूर्त रूप में पूजा जाता है. इस कारण भगवान को पोशाक पहनाई जाती हैं. हालांकि, आमतौर पर ये पोशाक उपयोग के बाद रद्दी में फेंक दी जाती हैं. इसमें मंदिरों, पंडालों के साथ घरों में भगवा के श्रंगार के वस्त्र शामिल होते हैं. रद्दी में जाने के बाद ये वस्त्र भगवान के अपमान के साथ प्रकृति को दूषित करते हैं. ऐसे में एक दिल्ली की एक संस्था मिशन के साथ आई है जो इसका विकल्प खोजकर लाई है. इसका नाम सम्पूर्णा है. जो इन कपड़ों को जोड़कर इनसे कई तरह के आइटम बनाती है.

बैंगल बॉक्स से लेकर पर्स तक का निर्माण

सम्पूर्णा संस्था भगवान की इस्तेमाल की गई पोसाकों का फिर से उपयोग करने जा रही है. इसके लिए संस्था ने कई महिलाओं का एक समूह बनाकर मंदिरों और आवसीय सोसाइटी से भगवान की पोशाकों को इकट्ठा करना शुरू किया. सम्पूर्णा संस्था की संस्थापिका डॉ शोभा बृजेन्द्र नें बताया कि भगवान की पोशाकों से घर में इस्तेमाल होने वाले कई चीजे तैयार की जा रही हैं. जिसमें महिलाओं के बैंगल बॉक्स से लेकर पर्स और थैले भी तैयार किया जा रहे हैं. घर में टेबल की सजावट से लेकर कुशन कवर भी तैयार किए गए हैं.

कोरोना में मास्क से हुई शुरुआत

डॉ शोभा बृजेन्द्र नें बताया कि देश मे 8 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड मंदिर हैं. जिसमें दिल्ली मे 49 हजार से ज्यादा मंदिर हैं. जिसमें से 14 हजार रजिस्टर्ड मंदिर हैं. उन्होंने कहा कि लोग पोशाक विसर्जित करते हैं. जिससे नदियों मे प्रदूषण बढ़ रहा हैं. इसको हल करने का प्रयास किया गया हैं. भगवान की पोशाक का फिर से इस्तेमाल किया जा रहा हैं. कोरोना मे सम्पूर्णा संस्था नें 10 लाख से ज्यादा कपड़ो के मास्क बनवाए थे. उन्होंने कहा कि हमारा मिशन देशभर में लोग आगे लेकर जाएं और धर्म के सम्मान के साथ प्रकृति की रक्षा करें यही हमारी सोच है.

सम्पूर्णा का अभियान

डॉ शोभा बृजेन्द्र नें बताया कि पानी शुद्धिकरण और बचाने के लिए के लिए सम्पूर्णा का अभियान चलाया जा रहा है. भगवान की पोशाक पानी में न जाने पाएं इसके लिए प्रयास शुरू किए गए गया है. उन्होंने बताया कि सम्पूर्णा सन 1993 से महिला सशक्तिकण तथा जल और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित संस्था है. सम्पूर्णा के कार्यकर्ता, वर्षा जल संचयन, सौर पैनल स्थापना, कूड़े का पृथक्करण, खाद बनाना और कपड़े के थैलों के उपयोग के बारे में जागरूक करते हैं. भगवान की पोशाकों से राम सौभाग्य थैला सबसे चर्चित प्रकल्प है.

ये भी पढ़ें: कौन है शराब के साथ प्रकट होने वाली मां लक्ष्मी की बहन? नींबू-मिर्च टांगने से है गहरा नाता, विवाह के लए भगवान विष्णु ने किया था ऐसा काम, जानें अनसुनी कहानी

जल निकाय के लिए कर रही हैं काम

शोभा बृजेन्द्र ने कहा कि भारत में विश्व की 18% आबादी निवास करती है जबकि जल संसाधन मात्र 4% है. नीति आयोग के 2018 जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार देश के 60 करोड़ भारतीय 2030 तक गंभीर जल संकट से जूझ सकते हैं. दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है. सम्पूर्णा, दिल्ली में जल निकाय (Water Bodies) के पुनर्जीवन को लेकर कार्यरत है. सरकारी संस्थाओं ने इनमें से कुछ जल निकायों को पुनर्जीवित भी किया था लेकिन सामुदायिक भागीदारी के अभाव में ये जल निकाय अपनी पुरानी अवस्था में लौट आए हैं.

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अनुसार दिल्ली में 1,367 जल निकाय है
  • केवल 674 ही वर्तमान में अस्तित्व में हैं
  • राजस्व रेकॉर्ड के अनुसार केवल 469 ही जमीन पर मौजूद हैं
  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में 216, उत्तर दिल्ली में 143. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 104 और पूर्वी दिल्ली में केवल 6 जल निकाय बचे हैं
  • उपग्रह चित्रों ने भी 322 जलाशयों की पुष्टि की है
  • हास्यास्पद है कि इनमें से मात्र 43 ही जमीन पर मौजूद हैं

सम्पूर्णा की पहल का असर

ऐसे में सम्पूर्णा ने एक ठोस पहल करते हुए 75 जल निकायों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है. इस अभियान में जल संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी, जल यात्राएं, नुक्कड़ नाटक और जल संवाद जैसे अनेक कार्यक्रम शामिल हैं, जिससे सामान्य जन को इस मुहिम के साथ सक्रिय रूप से जोड़ा जा सके. सम्पूर्णा का उद्देश्य जल निकायों का पुनर्जीवन ही नहीं, बल्कि जनमानस को जल साक्षर करना है. आइए, इस पहल का हिस्सा बनें और जल संरक्षण कर, जल की बूंद-बूंद बचाने में सहभागी बनें.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read