अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कई प्रोफेसर NIA के रडार पर हैं.
Delhi Blast Investigation: दिल्ली में 10 नवंबर को कार में हुए जानलेवा ब्लास्ट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. जांच एजेंसियों ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद खाड़ी देश भागने की तैयारी में थी, लेकिन नया पासपोर्ट न बन पाने के कारण वह देश छोड़कर नहीं जा पाई. सूत्रों के मुताबिक, शाहीन को खाड़ी देश में अपने पाकिस्तानी हैंडलर से मिलना था.
जांच एजेंसियों के निशाने पर फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी है, जहां से कई प्रोफेसर और डॉक्टर इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े पाए गए हैं.

खाड़ी देश भागने का था प्लान, रुका नया पासपोर्ट
दिल्ली ब्लास्ट की मुख्य आरोपियों में से एक डॉ. शाहीन सईद खाड़ी देश भागकर अपने पाकिस्तानी हैंडलर से मिलने की योजना बना रही थी. जांच एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शाहीन का पासपोर्ट जल्द ही एक्सपायर होने वाला था, जिसके चलते उसने नया पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन दिया था. नया पासपोर्ट समय पर न बन पाने के कारण उसका खाड़ी देश भागने का प्लान सफल नहीं हो सका और वह देश में ही रह गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी: आतंकियों का ‘सेफ हाउस’?
हरियाणा और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने नवंबर की शुरुआत में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छापा मारा था. यह यूनिवर्सिटी अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में 70 एकड़ में फैली हुई है. जांच एजेंसियों के रडार पर यहां के कई प्रोफेसर और छात्र हैं. पुलिस ने अब तक 52 से अधिक लोगों से पूछताछ की है और 6 लोगों को हिरासत में लेकर आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाई हैं.

डॉक्टरों का टेरर मॉड्यूल: वरिष्ठ डॉक्टरों की संलिप्तता
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में डॉ. शाहीन के अलावा डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल जैसे वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं. हिरासत में लिए गए ज्यादातर लोग जूनियर डॉक्टर्स हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है. एक चिंताजनक तथ्य यह भी सामने आया है कि यूनिवर्सिटी में लगभग 40% डॉक्टर कश्मीर क्षेत्र से आते हैं, जिसकी सूची जांच एजेंसियां खंगाल रही हैं. NIA की टीम ने शाहीन के फ्लैट से भारी मात्रा में कैश, सोना और विदेशी करेंसी भी बरामद की है, जिससे फंडिंग के तार जुड़ने की आशंका है.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चीफ जवाद अहमद सिद्दीकी
यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को भी ईडी (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है, और यूनिवर्सिटी की सदस्यता भी रद्द कर दी गई है. यूनिवर्सिटी का संचालन अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसके अंतर्गत कई शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं.
जांच एजेंसियों को शक है कि इस उच्च शिक्षा संस्थान का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और नेटवर्क तैयार करने के लिए एक सुरक्षित ठिकाने (Safe House) के रूप में किया जा रहा था. डॉ. शाहीन पर महिला छात्रों की सूची बनाकर आतंकी नेटवर्क बनाने की साजिश रचने का भी आरोप है.
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