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दिल्ली में भी 112 बनेगा एकमात्र इमरजेंसी नंबर, सीएम रेखा गुप्ता बोलीं— लोगों को अब अलग-अलग हेल्पलाइन से छुटकारा मिलेगा

दिल्ली में आपात सेवाओं को तेज और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लागू ERSS 2.0 के तहत अब किसी भी आपात स्थिति में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों की जरूरत नहीं होगी.

REKHA GUPTA

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में राजधानी में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी, त्वरित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. अब दिल्ली में किसी भी प्रकार की आपदा या आपात स्थिति में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर डायल नहीं करने पड़ेंगे. किसी भी तरह की आपात स्थिति में सिर्फ 112 डायल करने पर तेजी से मदद पहुंचेगी. इसकी शुरुआत इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) 2.0 के तहत की गई है. इस पहल का उद्देश्य लोगों को संकट की घड़ी में अलग-अलग नंबर याद रखने की परेशानी से मुक्त करना और उन्हें तेजी से सहायता उपलब्ध कराना है.

सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में पुलिस (100), अग्निशमन सेवा (101), एंबुलेंस/स्वास्थ्य सेवा (108), महिला सहायता (181), बाल सहायता (1098), गैस रिसाव (1906), बिजली आपूर्ति (19123), जल आपूर्ति (1916), दिल्ली मेट्रो (155370), और आपदा प्रबंधन/राहत सेवाओं (1077) सहित कई आपात सेवाओं के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर इस्तेमाल किए जाते हैं. इसकी वजह से संकट की स्थिति में आम नागरिकों को भ्रम और देरी का सामना करना पड़ता है. ईआरएसएस 2.0 के तहत हर तरह की आपात स्थितियों में अब अलग-अलग नंबर पर कॉल करने की जरूरत नहीं होगी. केवल 112 पर कॉल करके हर तरह की मदद मांगी जा सकेगी.

SMS और पैनिक बटन से भी पहुंचेगी मदद

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 112 को राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर घोषित किया गया है. इसी के मद्देनजर दिल्ली भी इसे लागू करने का काम करने जा रही है. उन्होंने बताया कि ईआरएसएस 2.0 एक आधुनिक यूनिफाइड सिग्नल हैंडलिंग सिस्टम है, जिसमें सभी इमरजेंसी कॉल, मोबाइल ऐप इमरजेंसी, पैनिक बटन, एसएमएस और वेब अलर्ट एक ही पब्लिक सेफ्टी आंसरिंग पॉइंट (पीएसएपी) पर प्राप्त होंगे. यहां से जिस भी तरह की इमरजेंसी होगी उसके आधार पर पुलिस, फायर, एम्बुलेंस और आपदा प्रबंधन सेवाओं को एक साथ अलर्ट किया जा सकेगा. इस प्रणाली में 112 पर सिर्फ कॉल ही नहीं, बल्कि मोबाइल ऐप, इमरजेंसी बटन, एसएमएस और ऑनलाइन माध्यम से भी सहायता मांगी जा सकती है यानी अगर कोई नागरिक आपात स्थिति में बोलने की स्थिति में नहीं है, तब भी वह आसानी से मदद का संकेत भेज सकता है.

उन्होंने बताया कि ईआरएसएस 2.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कॉल या इमरजेंसी का पता चलते ही सिस्टम अपने आप कॉल करने वाले की लोकेशन पहचान लेगा. इससे पीड़ित व्यक्ति को यह समझाने की जरूरत नहीं पड़ती कि वह कहां है. लोकेशन मिलते ही कंट्रोल रूम से सबसे नजदीकी पुलिस वैन, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड को तुरंत रवाना कर दिया जाएगा, जिससे गोल्डन ऑवर (शुरुआती 60 मिनट) में समय की बचत होगी और मदद जल्दी पहुंचेगी. इस नई व्यवस्था में एक ही कॉल पर पुलिस, फायर और मेडिकल सेवाओं को एक साथ सूचना मिलेगी. इससे आपात स्थिति में होने वाली देरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईआरएसएस 2.0 के तहत कंट्रोल रूम में एक आधुनिक डैशबोर्ड होगा, जहां यह देखा जा सकेगा कि घटना कहां हुई है, कौन-सी गाड़ी भेजी गई है और वह कितनी देर में पहुंचेगी. अगर कहीं देरी होती है तो तुरंत दूसरी गाड़ी भेजी जा सकती है. इससे पूरे ऑपरेशन पर लगातार निगरानी रहती है और जवाबदेही भी बढ़ती है.

उन्होंने बताया कि पूरी योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. पहले चरण में सभी मौजूदा आपात नंबरों को 112 में समाहित किया जाएगा. इसके बाद तकनीकी अपग्रेड, जन-जागरूकता अभियान, कॉल-टेकर्स का प्रशिक्षण और अंत में प्रणाली का मूल्यांकन किया जाएगा.

हर नागरिक तक पहुंचेगी मदद

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य राजधानी में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सरल, तेज और विश्वसनीय बनाना है, जिससे जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और दिल्ली को एक सुरक्षित, स्मार्ट और संवेदनशील राजधानी के रूप में विकसित किया जा सके.

उन्होंने यह भी बताया कि 112 के उपयोग को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक परिसरों, मेट्रो और बसों में 112 के प्रचार-प्रसार के लिए डिस्प्ले लगाए जाएंगे. इसके अलावा नियमित मॉक ड्रिल और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित कर विभिन्न विभागों की तैयारियों को परखा जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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