Fake Apple Tech Support Scam Delhi: तनु/दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बैठकर सात समंदर पार अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है. दिल्ली पुलिस की एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) ने पश्चिमी दिल्ली के नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर गिरोह के सरगना, उसके पार्टनर समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
गिरोह खुद को दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी ‘Apple’ का अधिकृत टेक्निकल-सपोर्ट एग्जीक्यूटिव बताता था. वह अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी खराबी और वायरस का डर दिखाकर लाखों रुपये के गिफ्ट कार्ड के जरिए ठगी करता था. पुलिस ने मौके से पांच लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, 10 क्रेडिट व डेबिट कार्ड, पांच चेक बुक और ठगी की कमाई से खरीदी गई एक आलीशान ऑडी कार बरामद की है.
‘Veptra’ के नाम से चल रहा था अड्डा (Fake Apple Call Center Naraina)
पुलिस को खुफिया इनपुट मिला था कि नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-II स्थित B-68/1B की तीसरी मंजिल पर ‘Veptra’ नाम से एक अवैध अंतरराष्ट्रीय टेक-सपोर्ट कॉल सेंटर संचालित हो रहा है. सूचना की पुष्टि के बाद AATS की टीम ने अचानक छापेमारी की.
दबिश के दौरान पुलिसकर्मी उस वक्त दंग रह गए जब कॉल सेंटर के अंदर बैठे युवक कानों में हेडफोन लगाए, लैपटॉप स्क्रीन पर अमेरिकी डेटाबेस खोले धाराप्रवाह अंग्रेजी में बात कर रहे थे. ये कॉलर्स फर्जी विदेशी नामों का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि अमेरिकी नागरिकों को किसी भी तरह का शक न हो. पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर के मुख्य संचालक अरुण, उसके बिजनेस पार्टनर सलीम और पांच अन्य कॉलर्स को रंगे हाथों धर दबोचा.
मैलवेयर और पोर्नोग्राफी का खौफ (US Citizens Fraud In Name Of Apple Tech)
शुरुआती पुलिस जांच में इस गिरोह के ठगी करने के शातिर तरीके का खुलासा हुआ है. गिरोह ने अमेरिका में इंटरनेट और सर्च इंजन विज्ञापनों के जरिए फर्जी टोल-फ्री नंबर (TFNs) फैला रखे थे. जैसे ही कोई अमेरिकी नागरिक तकनीकी मदद के लिए इन नंबरों पर कॉल करता था, दिल्ली में बैठे कॉलर्स खुद को Apple/iOS का आधिकारिक सपोर्ट इंजीनियर बताते थे.
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पीड़ितों को डराया जाता था कि उनके मैकबुक, आईफोन या आईपैड में गंभीर वायरस, मैलवेयर या संदिग्ध पोर्नोग्राफिक कंटेंट डिटेक्ट हुआ है, जिससे उनका पर्सनल डेटा और बैंक खाते खतरे में हैं. समस्या को ठीक करने का झांसा देकर पीड़ितों से कैश या सीधे ऑनलाइन ट्रांसफर के बजाय गिफ्ट कार्ड (जैसे Apple, Amazon, आदि) खरीदने को कहा जाता था. कोड हासिल करते ही गिरोह उसे आगे अपने नेटवर्क में भुना लेता था.
वसूली गई रकम की जांच में जुटी एजेंसियां
पुलिस अब आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल से बरामद डेटा, चैट हिस्ट्री और विदेशी बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से पड़ताल कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि यह फर्जी कॉल सेंटर कब से चल रहा था और अब तक कितने अमेरिकी नागरिकों से कितने करोड़ रुपये की ठगी की जा चुकी है. इसके अलावा, अमेरिका से गिफ्ट कार्ड कोड्स को कैश में बदलने वाले हवाला नेटवर्क और अन्य अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है.
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