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बैग में थी ‘बंदर की खोपड़ी’… दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर CISF ने दबोचा; आखिर किस काम आती है?

Monkey Skull Delhi IGI airport: नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर CISF ने एक यात्री के हैंड बैग से बंदर की खोपड़ी बरामद की है. यह यात्री दिल्ली से हैदराबाद जाने की फिराक में था. पुलिस वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामले की जांच कर रही है.

Delhi IGI airport Monkey skull found

Monkey Skull Delhi IGI airport: दिल्ली/स्कंदिता: नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान एक ऐसा खौफनाक वाकया सामने आया है, जिसने सुरक्षाकर्मियों (CISF) के भी कान खड़े कर दिए. एक यात्री के हैंड बैगेज से ऐसी चीज निकली, जिसे देखकर हर कोई सन्न रह गया. यह शख्स बड़ी ही चालाकी से अपने बैग में ‘बंदर की खोपड़ी’ छिपाकर दिल्ली से हैदराबाद ले जाने की फिराक में था.

स्कैनिंग में पकड़ा गया ‘खौफनाक’ सामान

CISF के अनुसार, यह घटना 10 अगस्त की है. यात्री को दिल्ली से हैदराबाद (Delhi to Hyderabad flight) की यात्रा करनी थी. प्लेन में चढ़ने से पहले जब प्री-एम्बार्केशन सिक्योरिटी चेक (सुरक्षा जांच) की जा रही थी, तभी एक्स-रे मशीन में CISF जवानों को यात्री के हैंड बैगेज में कुछ बेहद संदिग्ध नजर आया. शक होने पर जब बैग खुलवाकर बारीकी से तलाशी ली गई, तो उसमें से एक खोपड़ी बरामद हुई. पूछताछ करने पर यात्री ने खुद कबूल किया कि यह एक बंदर की खोपड़ी है.

Delhi IGI airport Monkey skull found

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पुलिस के हवाले (Delhi airport wildlife smuggling)

मामला वन्यजीवों से जुड़ा होने के कारण सीआईएसएफ ने तुरंत सतर्कता दिखाई. खोपड़ी की प्रकृति और वन्यजीव तस्करी के संदेह को देखते हुए, CISF ने यात्री और उस बरामद खोपड़ी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया है. पुलिस अब वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर गहराई से जांच कर रही है कि यह शख्स यह खोपड़ी कहां से लाया था और इसका क्या करने वाला था.

Delhi IGI airport Monkey skull found

आखिर किस काम आती है बंदर की खोपड़ी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कोई शख्स बंदर की खोपड़ी लेकर हवाई यात्रा क्यों कर रहा था? विशेषज्ञों की मानें तो मरे हुए बंदरों की खोपड़ी का इस्तेमाल अक्सर तंत्र-मंत्र और काले जादू के लिए किया जाता है.

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इसके अलावा, बंदरों के सिर की बनावट इंसानों से काफी मिलती-जुलती होने के कारण एनाटॉमी रिसर्च और वैज्ञानिक अनुसंधान में भी इसका प्रयोग होता है. अफ्रीका समेत दुनिया के कई पारंपरिक बाजारों में इसे दवा या रक्षक के तौर पर भी उपयोग किया जाता है. फिलहाल पुलिस यात्री से पूछताछ कर इस पूरी गुत्थी को सुलझाने में जुटी है.



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