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डिजिटल अरेस्ट का जानलेवा जाल! जोधपुर और ग्वालियर में दो बुजुर्गों से 4.37 करोड़ की ठगी; जानें कैसे बचें?

Digital Arrest Fraud Case: जोधपुर की रिटायर्ड शिक्षिका और ग्वालियर के एयरफोर्स अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 4.37 करोड़ की ठगी. जानें कैसे ठगों ने CBI और पुलिस बनकर करोड़ों लूटे और आप इससे कैसे बच सकते हैं.

Digital Arrest Fraud Case

Digital Arrest Fraud Case: देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले अब महामारी की तरह फैल रहे हैं. हाल ही में राजस्थान के जोधपुर और मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दो रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं. ठगों ने कानून का डर दिखाकर दो रिटायर्ड बुजुर्गों से कुल 4 करोड़ 37 लाख रुपये हड़प लिए. इन मामलों ने न केवल साइबर सुरक्षा बल्कि कुछ बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

6 दिनों तक ‘कैद’ रही वर्षीय सरस्वती

जोधपुर के कमला नेहरू नगर की रहने वाली सरस्वती माहेश्वरी (75) शिक्षा विभाग से रिटायर्ड हैं. घर में वह अकेली रहती थीं. ठगों ने ‘मुंबई क्राइम ब्रांच’ का अधिकारी बनकर उन्हें फोन किया और दावा किया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में फर्जी खाता खोलकर कमीशन लिया गया है. हैरानी की बात यह रही कि महिला ने SBI खाते से 1.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, लेकिन बैंक ने एक बार भी इतने बड़े ट्रांजेक्शन पर अलर्ट नहीं दिखाया.

12 फरवरी को उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया. ठगों ने वीडियो कॉल पर ही फर्जी ‘कोर्ट सुनवाई’ का नाटक रचा. डरी हुई महिला ने 1 करोड़ 85 लाख 23 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए. ठगों की भूख यहीं शांत नहीं हुई. वे सोमवार को महिला से 30 लाख रुपये और मंगवा रहे थे. जब महिला पंजाब नेशनल बैंक (PNB) पहुंची, तो बैंक कर्मियों को शक हुआ. उन्होंने पूछताछ की और महिला को फ्रॉड से बचाया.

एयरफोर्स अधिकारी से लूट

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी ऐसा ही शिकार एयरफोर्स के रिटायर्ड अधिकारी नारायण बांदिल को बनाया गया. ठगों ने यहाँ ‘दिल्ली CBI अधिकारी’ का मुखौटा पहना था. बांदिल को 28 जनवरी 2026 से आज तक डिजिटल अरेस्ट पर रखा गया. उन्हें डराया गया कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल भारी वित्तीय फ्रॉड में हुआ है.

डरा-धमकाकर ठगों ने रिटायर्ड अधिकारी से 2 करोड़ 52 लाख रुपये ऐंठ लिए. ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जो फिलहाल मामले की जांच कर रही है.

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क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’ और कैसे बचें?

पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश और साइबर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है. पुलिस/CBI कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती. कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल (Skype/WhatsApp) के जरिए किसी को घर में कैद रहने का आदेश नहीं दे सकती. जांच के नाम पर पैसे किसी अनजान खाते में ट्रांसफर करने को कहना ही सबसे बड़ा सबूत है कि सामने वाला ठग है. यदि ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत अपने परिवार या पड़ोसियों को बताएं.



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