केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस (ISB) और इंटरपोल के सहयोग से ‘Securing the Future of Creativity’ शीर्षक से दो दिवसीय डिजिटल पायरेसी सम्मेलन का आयोजन 9-10 जुलाई को ISB हैदराबाद परिसर में किया गया.
सम्मेलन का उद्घाटन सीबीआई के संयुक्त निदेशक श्री एस. वीरेश प्रभु और ISB इंस्टीट्यूट ऑफ डेटा साइंस के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर मनीष गंगवार ने किया. उद्घाटन भाषण में श्री वीरेश प्रभु ने कहा, डिजिटल पायरेसी अब अलग-थलग समस्या नहीं रही, बल्कि यह संगठित साइबर अपराध से गहराई से जुड़ी है और इसके लिए समन्वित प्रयास की आवश्यकता है.

मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री राजीव शर्मा, आईपीएस ने बदलते डिजिटल खतरों पर प्रकाश डालते हुए कहा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को न केवल अपनी जांच क्षमताओं को उन्नत करना होगा, बल्कि डिजिटल अपराधियों से आगे रहने के लिए उद्योग और अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोगी नेटवर्क भी तैयार करने होंगे.
सम्मेलन में कानून प्रवर्तन के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर क्राइम विशेषज्ञ, विधि और नीति से जुड़े पेशेवर, शैक्षणिक शोधकर्ता और उद्योग जगत के नेता शामिल हुए. इस दौरान डिजिटल पायरेसी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई.
तकनीकी व कानूनी चुनौतियों पर रखे विचार
सत्रों में पायरेसी और मालवेयर के बीच संबंध, भारत के ऑनलाइन वीडियो सेक्टर पर पायरेसी का प्रभाव, डिजिटल पायरेसी की जांच में तकनीकी चुनौतियाँ, कानूनी चुनौतियाँ, संगीत पायरेसी से मुकाबला, जांच और विश्लेषणात्मक कौशल, और ऑनलाइन पायरेसी के प्रति इंटरपोल की प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुति दी.

सम्मेलन के दौरान यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए जागरूकता निर्माण और क्षमता विकास के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी भी डिजिटल पायरेसी के बदलते खतरों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण रणनीति है.
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