दिग्विजय सिंह की पदयात्रा
रिपोर्ट- अजय भटनागर/भोपाल
Digvijaya Singh Yatra: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों अपनी नई पदयात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं. दशहरे के मौके पर उन्होंने उज्जैन स्थित बाबा महाकाल की धरती से अयोध्या के लिए पैदल यात्रा की शुरुआत की. इस अभियान को उन्होंने सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा नाम दिया है. यात्रा के शुभारंभ के दौरान उनके साथ पत्नी अमृता सिंह भी मौजूद रहीं. इसके अलावा बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता भी इस यात्रा का हिस्सा बने. दिग्विजय सिंह का यह अभियान सिर्फ धार्मिक स्थलों तक पहुंचने की कवायद नहीं, बल्कि एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है.
रोजाना 15 किलोमीटर का लक्ष्य
यह यात्रा करीब 900 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है. तय कार्यक्रम के अनुसार दिग्विजय सिंह प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे. पूरी यात्रा का लगभग आधा हिस्सा मध्य प्रदेश में और बाकी आधा उत्तर प्रदेश में पूरा होगा. यात्रा के दौरान तिरंगे के साथ पांच रंगों वाली विशेष ध्वजा भी रखी जाएगी. समर्थकों का कहना है कि यह यात्रा समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करने और सनातन मूल्यों के प्रति सम्मान का संदेश देने के उद्देश्य से निकाली जा रही है.
गैर राजनीतिक दावा लेकिन मुद्दे पूरी तरह राजनीतिक
दिग्विजय सिंह लगातार कह रहे हैं कि उनकी यह यात्रा राजनीति से प्रेरित नहीं है. हालांकि यात्रा की शुरुआत से पहले और इसके दौरान जिन मुद्दों को वे उठा रहे हैं, उन्हें लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. वे राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे के हिसाब और कथित वोट चोरी जैसे विषयों पर सरकार को घेर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए. वहीं वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी वे लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं. हालांकि वे इन मुद्दों को जनता के सामने अपनी बात रखने का प्रयास बता रहे हैं, न कि चुनावी राजनीति.
सत्ता पक्ष ने बताया राजनीतिक मंचन
दूसरी ओर भाजपा और सत्ता पक्ष से जुड़े कई नेता इस यात्रा को लेकर तीखे सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि यह पूरी कवायद राजनीतिक मकसद से की जा रही है. विरोधी दलों के नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले राम मंदिर के विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते रहे, वे अब मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे को लेकर अचानक इतनी सक्रियता क्यों दिखा रहे हैं. इसी वजह से सत्तारूढ़ दल के कई नेता इस यात्रा को गंभीर जनआंदोलन नहीं बल्कि राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.
यूपी चुनाव से जोड़कर भी देखी जा रही यात्रा
राजनीतिक गलियारों में इस यात्रा को आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. दिग्विजय सिंह को लंबे अनुभव वाला रणनीतिक नेता माना जाता है और अक्सर उनके बयान तथा राजनीतिक कदमों के पीछे बड़े सियासी संकेत तलाशे जाते हैं. ऐसे में विपक्ष जिन मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरने की कोशिश कर रहा है, उन्हीं विषयों को इस यात्रा में प्रमुखता से उठाया जा रहा है.
पहले भी कर चुके हैं ऐसी राजनीतिक यात्राएं
यह पहली बार नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने लंबी पदयात्रा निकाली हो. इससे पहले वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व उन्होंने नर्मदा परिक्रमा यात्रा की थी. उस चुनाव में लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस की सरकार बनी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने. हालांकि वह सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी. राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग उस दौर की परिस्थितियों के लिए दिग्विजय सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाता रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश में प्रवेश के बाद उनके कौन से नए बयान सामने आते हैं और इस यात्रा का विपक्ष को चुनावी स्तर पर कितना फायदा मिलता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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