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‘यह जेन-जी और राष्ट्रवाद की जीत है’… डूसू चुनाव जीतने के बाद एबीवीपी के नए चेहरों ने किए बड़े वादे

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की. अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह विजयी रहे.

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 के नतीजे सामने आ चुके हैं, और इस बार का परिणाम कई मायनों में बेहद दिलचस्प रहा है. एबीवीपी यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस बार बाजी मारते हुए तीन अहम पदों पर अपना कब्जा जमा लिया है. इस जीत के बाद से छात्र संगठन में जश्न का माहौल है. आइए जानते हैं कि इस बार डूसू चुनाव में जीत के बाद विजेता छात्र नेताओं ने क्या कुछ कहा है और उनके क्या वादे हैं.

किन चेहरों ने मारी बाजी?

इस बार के चुनावों में एबीवीपी के पैनल ने शानदार प्रदर्शन किया है. चुनाव नतीजों के मुताबिक,

  • अध्यक्ष पद: यश डबास ने बाजी मारी है और वे डूसू के नए अध्यक्ष चुने गए हैं.
  • उपाध्यक्ष पद: दीपांशु शौकीन (निर्दलीय) इस पद पर विजयी रहे हैं.
  • सचिव पद: रिया छावड़ी ने शानदार जीत हासिल करते हुए सचिव पद संभाला है.
  • संयुक्त सचिव पद: लक्ष्यराज सिंह इस पद पर विजयी रहे हैं.

‘यह जेन-जी और राष्ट्रवाद की जीत है’

जीत के बाद मीडिया से बातचीत में नवनिर्वाचित सचिव रिया छावड़ी काफी उत्साहित नजर आईं. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह मौजूदा पीढ़ी यानी जेन-जी की जीत है. रिया के मुताबिक, यह उन तमाम युवाओं का समर्थन है जो देश के विकास और राष्ट्रवाद की सोच के साथ मजबूती से खड़े हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह करने की बहुत कोशिशें हुईं, लेकिन अंत में सच की ही जीत हुई. रिया ने इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने संगठन, मेहनत करने वाली टीम, परिवार और उन तमाम स्टूडेंट्स को दिया जिन्होंने मुश्किल वक्त में भी एबीवीपी का साथ नहीं छोड़ा.

हॉस्टल की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाना पहली प्राथमिकता

डूसू के नए अध्यक्ष यश डबास ने खुद को जेन-जी का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो झूठी अफवाहें फैला रहे थे. यह साबित हो गया है कि आज का युवा देश और एबीवीपी के साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है.

अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बात करते हुए यश ने बहुत ही अहम मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी सबसे पहली प्राथमिकता डीयू के सभी पीजी और हॉस्टल्स का सेफ्टी ऑडिट कराना होगी. सत्य निकेतन जैसी अप्रिय घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना बेहद जरूरी है. इसके अलावा, उन्होंने हॉस्टल में कम बेड होने की पुरानी समस्या पर भी रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि साल 2015 में जहां डीयू के हॉस्टलों में सिर्फ 5,700 के करीब बेड हुआ करते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 12,000 के पार पहुंच गया है. हालांकि, उनका लक्ष्य है कि इसे और आगे बढ़ाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को रहने की सुविधा मिल सके.

राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले लक्ष्यराज की खास जीत

संयुक्त सचिव बने लक्ष्यराज सिंह की जीत भी काफी चर्चा में है. उन्होंने बताया कि पूरे 12 साल बाद राजस्थान से किसी उम्मीदवार को यह मौका मिला था. चुनाव का मुकाबला काफी कड़ा था, लेकिन उनके दोस्तों, सहपाठियों और राजस्थान से जुड़े समर्थकों ने उनका पूरा साथ दिया, जिसकी बदौलत यह सफलता हाथ लगी.

निर्वतमान अध्यक्ष आर्यन मान ने भी इन नतीजों पर खुशी जताई और कहा कि एनएसयूआई के तमाम बड़े दावों के बावजूद उन्हें खाली हाथ रहना पड़ा है. आज का युवा पूरी तरह परिपक्व है और वह राजनीति और असल मुद्दों के बीच का फर्क अच्छी तरह समझता है. यही वजह है कि तमाम विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों के बाद भी छात्रों ने एक बार फिर एबीवीपी पर अपना भरोसा जताया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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