गले की फांस बना फॉर्म-6
SIR से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कुल 19 विपक्षी दलों के सांसदों ने CEC के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. यह पहला मौका है जब मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़क पर उतरकर विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर सीधे कहा है कि ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो, टाइम टू रिजाइन, यानी ज्ञानेश हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का वक्त आ गया है.
आखिर फॉर्म-6 क्या है और क्यों हो रहा है इतना हंगामा?
चुनाव आयोग के अनुसार वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान नए वोटरों का नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 का सिस्टम बनाया गया है. कोई भी नया वोटर इस फॉर्म के जरिए अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है. इसके बाद चुनाव आयोग के अधिकारी उसकी जांच करते हैं और फिर उसका नाम आसानी से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाता है. लेकिन इसी फॉर्म-6 में किए गए तीन बदलावों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है.
फॉर्म-6 में कौन से तीन बदलाव किए गए जिन पर विवाद है?
पहला बदलाव यह है कि नए वोटर को अब यह बताना पड़ेगा कि क्या उसका नाम पहले किसी वोटर लिस्ट में था या नहीं. दूसरा बदलाव यह है कि अगर उसका नाम पहले किसी लिस्ट में नहीं था, तो क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी और नाना-नानी का नाम उस पुरानी SIR लिस्ट में शामिल था. तीसरा बदलाव यह है कि अगर न तो उसका नाम और न ही उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस पुरानी SIR लिस्ट में था, तो उसे इसकी भी जानकारी देनी होगी. विपक्ष का आरोप है कि ये तीनों बदलाव मनमाने तरीके से किए गए हैं, जबकि आयोग का कहना है कि सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की इजाजत और आयोग के तीनों सदस्यों की आपसी सहमति से हुआ है.
ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें क्यों बढ़ीं?
ज्ञानेश कुमार के घिरने के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं. पहली वजह इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में बदलाव पर ऐतराज जताया था, लेकिन उनकी आपत्ति को अनसुना कर दिया गया. दूसरी वजह सोमवार को हुई सुनवाई है, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने साफ कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर कोर्ट ने कोई मंजूरी नहीं दी थी.
यह बात बिल्कुल स्पष्ट है. तीसरी वजह अंजलि भारद्वाज की याचिका है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका लगाई है, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली में जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं, उन्हें दोबारा फॉर्म-6 भरने को कहा जा रहा है. उनके वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि यह तरीका पूरी तरह गलत है.
क्या CEC ज्ञानेश कुमार पर इसका कोई असर पड़ेगा?
फिलहाल ज्ञानेश कुमार पर इसका सीधा असर पड़ता नहीं दिख रहा. चुनाव आयोग से जुड़े नए कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त को खास सुरक्षा दी गई है. इस कानून के मुताबिक चुनाव आयोग के किसी भी फैसले को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त या दोनों चुनाव आयुक्तों के खिलाफ न तो कोई केस दर्ज किया जा सकता है और न ही किसी अदालत में इस पर सुनवाई हो सकती है. रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें यह सुरक्षा मिली रहेगी.
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सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस जे बागची ने भी कहा कि इन्हें राष्ट्रपति जितनी सुरक्षा मिली हुई है. कुल मिलाकर अभी ज्ञानेश कुमार पूरी तरह सेफ हैं और उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है. हालांकि विपक्ष कह रहा है कि संसद के अगले सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग लाया जाएगा. महाभियोग प्रस्ताव को पास कराने के लिए दो तिहाई सांसदों का समर्थन चाहिए लेकिन नंबर गेम में विपक्ष अभी काफी कमजोर स्थिति में है.
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-भारत एक्सप्रेस
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