पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर से राजनीतिक भूचाल का कारण बन गया है. संगरूर जिले में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक दलित व्यक्ति गुलजार सिंह (Gulzar Singh) की आत्महत्या के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ आर-पार का मोर्चा खोल दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया (Gaurav Bhatia) ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बेहद तीखा हमला बोला और उनका तुरंत इस्तीफा मांगा.
क्या है पूरा मामला?
बीजेपी के मुताबिक, संगरूर के एक आम नागरिक गुलजार सिंह (जो अनुसूचित जाति से आते थे) ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा (Harpal Singh Cheema) के सामने गांव में खुलेआम बिक रहे ‘चिट्टे’ (ड्रग्स) को लेकर गुहार लगाई थी. गुलजार ने मंत्री को बताया था कि नशे ने पंजाब के युवाओं को बर्बाद कर दिया है, उसका अपना बेटा भी ड्रग्स का आदी हो गया है और इलाज के चक्कर में घर का सारा कीमती सामान बिक चुका है.
आरोप है कि इस शिकायत के बाद मंत्री के जाने पर स्थानीय AAP सरपंच और अन्य नेताओं ने गुलजार सिंह के घर जाकर उसे प्रताड़ित किया और मंत्री से माफी मांगने का भारी दबाव बनाया. इस प्रताड़ना और धमकी से टूटकर गुलजार सिंह ने जहर खा लिया और 7 सितंबर को अस्पताल में उसकी मौत हो गई.
वीडियो में मंत्री और सरपंच को ठहराया जिम्मेदार
जहर खाने के बाद गुलजार सिंह ने अपना एक आखिरी वीडियो भी बनाया था. बीजेपी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस वीडियो में गुलजार स्पष्ट रूप से पंजाब में आसानी से मिल रहे नशे और सरकार की नाकामी का जिक्र कर रहा है. वह अपनी मौत के लिए मंत्री हरपाल चीमा, सरपंच सहित 4 लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहा है.
सूर्यास्त और भगवंत मान मस्त- गौरव भाटिया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौरव भाटिया ने सीएम भगवंत मान पर सीधा और व्यक्तिगत हमला किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हम हमेशा कहते हैं कि सूर्य अस्त और भगवंत मान मस्त! जो व्यक्ति खुद अपनी जिम्मेदारी न निभाए और शाम को खुद नशा करे, वो पंजाब को नशामुक्त क्या खाक करेगा? भाटिया ने आम आदमी पार्टी सरकार से कड़े सवाल पूछते हुए अपनी मांगें रखीं.
- मुख्यमंत्री भगवंत मान इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दें.
- क्या दलित व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने पर मंत्री हरपाल सिंह चीमा को सस्पेंड किया गया?
- क्या आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (10 साल की सजा) और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है?
नशे की आग में जलता पंजाब
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पंजाब में नशे का जाल कितनी गहराई तक फैला है और जमीनी स्तर पर सिस्टम किस कदर लाचार है. एक पिता जो अपने बेटे को नशे से बचाना चाहता था, उसे सिस्टम से लड़ते हुए अपनी जान गंवानी पड़ी. अब देखना यह है कि बीजेपी के इस चौतरफा हमले के बाद भगवंत मान सरकार और आम आदमी पार्टी क्या सफाई पेश करती है.
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