सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुर्सी पर बवाल
UP News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शनिवार को समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐसा हंगामा हुआ कि पार्टी की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई. मामला सिर्फ एक कुर्सी पर बैठने से शुरू हुआ लेकिन कुछ ही देर में दो पक्षों के बीच गाली-गलौज और मारपीट होने लगी. विवाद सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी और गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे अंशुमान सिंह के समर्थकों के बीच हुआ. घटना के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया और योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने इस मामले में सीधे अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कार्रवाई की मांग कर दी.
‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ की जानकारी के दौरान हुआ हंगामा
गोरखपुर प्रेस क्लब के सभागार में सपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ को लेकर जानकारी दे रहे थे. यह अभियान 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चलना है. इसी दौरान अंशुमान सिंह अपने कुछ समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए. दोपहर करीब 2.45 बजे बैठने की जगह को लेकर नगीना साहनी और अंशुमान सिंह के पक्ष के लोगों में कहासुनी शुरू हो गई. देखते ही देखते बातचीत का मामला विवाद में बदल गया.
बहस के बाद थप्पड़ मारने का आरोप
कुर्सी को लेकर शुरू हुई तकरार में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई. आरोप है कि इसके बाद गाली-गलौज और हाथापाई होने लगी. इसी दौरान नगीना साहनी को अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह ने थप्पड़ मार दिया. घटना का वीडियो भी सामने आया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. प्रेस क्लब में मौजूद पार्टी नेताओं ने किसी तरह बीच में पड़कर दोनों पक्षों को अलग किया. विवाद के कुछ समय बाद समाजवादी पार्टी ने अंशुमान सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
अंशुमान सिंह ने बताई विवाद की अलग वजह
अंशुमान सिंह के मुताबिक सभागार में ज्यादातर सीटें पहले से भरी हुई थीं, जबकि कुछ जगह खाली थी. उनका कहना है कि उन्होंने एक अतिरिक्त कुर्सी मंगवाई और नगीना साहनी से थोड़ा किनारे बैठने के लिए कहा था. नगीना साहनी के तैयार नहीं होने के बाद दोनों तरफ से बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया.
अंशुमान सिंह ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दिए जाने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि नगीना साहनी उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जिस गोरखपुर ग्रामीण सीट से वह टिकट मांग रहे हैं, उसी सीट पर नगीना साहनी भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं.
मुझे बदनाम करने की कोशिश- अंशुमान
अंशुमान सिंह ने आगे आरोप लगाया कि नगीना साहनी चाहते हैं कि उनके साथ किसी तरह का विवाद खड़ा हो और फिर उसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर उनकी छवि खराब की जाए. उन्होंने पूर्व जिलाध्यक्ष पर गाली-गलौज करने और सपा के प्रत्याशियों के खिलाफ बयान देने का आरोप भी लगाया. हालांकि अंशुमान का कहना है कि उनकी तरफ से किसी तरह की गाली-गलौज नहीं की गई.
जबरन खाली कराई जा रही थी कुर्सी- नगीना साहनी
दूसरी तरफ नगीना साहनी ने पूरे मामले को अलग तरीके से बताया. उनका कहना है कि जब प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी, उसी दौरान अंशुमान सिंह कुछ लोगों के साथ वहां पहुंचे. उनके मुताबिक, साथ आए लोगों ने उनसे जबरन कुर्सी खाली करने के लिए कहा. नगीना ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई.
नगीना साहनी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई. उन्होंने कहा कि वह मछुआरा-निषाद समुदाय से आते हैं और इसी वजह से उन्हें कमजोर समझकर निशाना बनाया गया. उनका आरोप है कि कुछ लोग अपना दबदबा कायम करने के लिए गुंडई का सहारा ले रहे हैं.
अवैध हथियार लाने का भी लगाया आरोप
नगीना साहनी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अंशुमान सिंह के साथ आए कुछ लोगों के पास अवैध हथियार भी थे. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. इस आरोप के सामने आने के बाद विवाद और गंभीर हो गया है.
संजय निषाद ने अखिलेश यादव से मांगी कार्रवाई
मामले पर योगी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय कुमार निषाद ने नगीना साहनी का समर्थन किया. उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से अंशुमान सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने और मुकदमा दर्ज कराने की मांग की.
संजय निषाद ने कहा कि गोरखपुर में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी के साथ अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह और उनके समर्थकों की ओर से थप्पड़ और मारपीट की घटना बेहद हैरान करने वाली है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी कुर्सी पर बैठने का अधिकार सिर्फ सामंतवादी सोच रखने वाले लोगों तक सीमित है?
‘जब सपा का झंडा उठाने वाला कोई नहीं था’
संजय निषाद ने नगीना साहनी के पुराने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में भी समाजवादी पार्टी का झंडा और डंडा उठाया, जब गोरखपुर में सपा के साथ खड़े होने वाले लोग कम थे. उनका दावा है कि उस समय यादव समाज के लोग भी सपा का झंडा उठाने को तैयार नहीं थे और निषाद समाज के लोगों ने पार्टी का साथ दिया था.
उन्होंने कहा कि सिर्फ कुर्सी पर बैठने के विवाद में किसी को थप्पड़ मारना और उसके साथ मारपीट करना बेहद निंदनीय और दुखद है.
अखिलेश यादव को दिया दो दिन का अल्टीमेटम
संजय निषाद ने अखिलेश यादव को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि वह उन्हें अगले दिन तक का समय दे रहे हैं. उन्होंने मांग की कि अखिलेश यादव अपने दबंग नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएं और इस घटना की सार्वजनिक रूप से निंदा करें. ऐसा नहीं होने पर संजय निषाद ने कहा कि वह उसके अगले दिन समाजवादी पार्टी कार्यालय का घेराव करने पहुंचेंगे.
निषाद समाज को भी संजय निषाद की नसीहत
संजय निषाद ने इस पूरे घटनाक्रम को निषाद समाज के लिए भी सीख बताया. उन्होंने कहा कि समाज को उन नेताओं की राजनीति को समझना चाहिए, जो हाल के दिनों में कैंडल मार्च निकालकर और घड़ियाली आंसू बहाकर यह सवाल उठा रहे थे कि भाजपा के साथ जाने से निषाद पार्टी को क्या हासिल हुआ.
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उन्होंने कहा कि उन्हें आज इस बात पर गर्व है कि भाजपा के किसी नेता ने निषाद समाज के व्यक्ति को थप्पड़ नहीं मारा. उनके इस बयान के बाद गोरखपुर का यह विवाद अब केवल सपा के दो नेताओं के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने यूपी की सियासत में भी नई बहस छेड़ दी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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