मोदी सरकार के संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) सरकार की आखिरी कड़ी नहीं, बल्कि पहली कड़ी हैं. वे सरकारी सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यह बात उन्होंने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में कही.
ग्रामीण भारत की धड़कन
मंत्री ने ग्रामीण डाक सेवकों को ‘ग्रामीण भारत की धड़कन’ बताया. उन्होंने कहा, “आप शासन की अंतिम कड़ी नहीं हैं, आप पहली कड़ी हैं. आपके बिना सरकारी सेवाएं गांवों तक नहीं पहुंच सकतीं.” डाक सेवक पत्र और पार्सल पहुंचाने के अलावा बैंकिंग, आधार, पासपोर्ट जैसी सेवाएं भी घर-घर तक ले जाते हैं.
खराब मौसम में भी विश्वास का पुल
पेम्मासानी ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद ये डाक सेवक सरकार और नागरिकों के बीच भरोसे का सेतु बने रहते हैं. कई गांवों में वे लोगों को पत्र लिखने-पढ़ने में भी मदद करते थे. इससे ग्रामीण लोग बाहरी दुनिया से जुड़े रहते थे.
ई-कॉमर्स में बड़ा अवसर
मंत्री ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बात की. उन्होंने कहा कि इंडिया पोस्ट के पास ई-कॉमर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा मौका है. इंडिया पोस्ट अभी पार्सल से 1,000 करोड़ रुपये से कम कमाती है, जबकि एक निजी कंपनी करीब 6,000 करोड़ रुपये कमाती है.
इंडिया पोस्ट का बड़ा नेटवर्क
पेम्मासानी ने बताया कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क में से एक है. इसमें लगभग चार लाख नियमित कर्मचारी और 2.5 लाख से ज्यादा ग्रामीण डाक सेवक काम करते हैं. ये 1.6 लाख से अधिक डाकघरों में सेवाएं देते हैं. इंडिया पोस्ट कई दशकों से कानूनी दस्तावेज, मनी ऑर्डर, अखबार और किताबें पहुंचाती रही है.
आधुनिक बन रहा डाक विभाग
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में सरकार डाक विभाग को आधुनिक और तकनीक आधारित लॉजिस्टिक्स संगठन बनाने पर काम कर रही है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं और बेहतर होंगी. सम्मेलन में डाक कर्मचारियों की मेहनत की सराहना की गई और उन्हें सम्मानित किया गया.
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