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कब तक खाली गड्ढा बनता रहेगा मौत का कुआं? दिल्ली-नोएडा के बाद अब ग्रेटर नोएडा में 3 साल का मासूम बना शिकार

ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ में तीन साल का देवांश बारिश से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर जान गंवा बैठा. ग्रामीणों ने पहले भी शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं..

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Greater Noida Child Death: देश में विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढे अब मौत के कुएँ बन चुके हैं. कोई दूर-दराज का गाँव नहीं, बल्कि दिल्ली एनसीआर की चकाचौंध वाली सड़कों के किनारे ये गड्ढे हर रोज किसी न किसी की जान ले रहे हैं. नोएडा में इंजीनियर युवराज, दिल्ली में बैंककर्मी कमल के बाद अब ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ में तीन साल का मासूम देवांश खेलते-खेलते गहरे गड्ढे में गिर गया. जब तक माँ-परिवार और ग्रामीण उसे बाहर निकाल पाते, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं. एक बच्चा जो बोलना सीख रहा था, उसकी आवाज़ प्रशासन की लापरवाही में हमेशा के लिए दब गई.

खेलते-खेलते मौत के कुएँ में समा गया मासूम

दलेलगढ़ निवासी अनिल की बेटी अंजलि कुछ दिन पहले ही ससुराल सिकंदराबाद से मायके लौटी थीं. अपने तीन साल के बेटे देवांश और बेटी के साथ आईं अंजलि शनिवार को गांव के पास मंदिर में चल रहे भंडारे में शामिल होने गईं. खेलते-खेलते देवांश पास में बने गहरे गड्ढे के पास पहुँच गया, जिसमें बारिश का पानी भरा हुआ था. अचानक वह गड्ढे में गिर गया. जब तक परिवार और ग्रामीण बच्चे को निकाल पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मासूम की सांसें थम चुकी थीं. पूरे परिवार में कोहराम मच गया.

ग्रामीणों की पहले से की थी शिकायत

गाँव वालों का कहना है कि यह गड्ढा लंबे समय से खुला पड़ा था. बारिश के बाद इसमें पानी भर जाने से खतरा और बढ़ गया था. ग्रामीणों के मुताबिक सेक्टर-150 में हुई पिछली घटना के बाद उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर ऐसे खतरनाक गड्ढों को भरने और सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की थी. लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. प्रशासन की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कितने बच्चे और कितनी मासूम जानें जाने के बाद प्रशासन जागेगा?

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प्राधिकरण बचाव में क्या बोला?

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी. जांच में पता चला कि जिस जमीन पर गड्ढा था, वह गांव के एक किसान के नाम दर्ज है और यह कोई सरकारी तालाब नहीं है. उसी जमीन पर पानी भरा हुआ था. लेकिन सवाल अब भी वही हैं कि कब तक ऐसे खुले और असुरक्षित गड्ढे लोगों की जान लेते रहेंगे? क्या प्रशासन तभी जागेगा जब कोई और बड़ा हादसा हो जाए? या फिर मासूमों की चीखें भी अब बेअसर हो गई हैं?

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-भारत एक्सप्रेस



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