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आशा किरण शेल्टर होम में मौतों को लेकर सख्त हुआ हाईकोर्ट, दिल्ली सरकार को लगाई फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के वित्त विभाग को एमसीडी से बिल्डिंग को अधिग्रहित करने के लिए सामाजिक न्याय विभाग को फंड आवंटित करने में विफल रहने पर फटकार लगाई. जिसका उद्देश्य आशा किरण में भीड़भाड़ कम करना है.

Asha kiran

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के वित्त विभाग को एमसीडी से बिल्डिंग को अधिग्रहित करने के लिए सामाजिक न्याय विभाग को फंड आवंटित करने में विफल रहने पर फटकार लगाई.  जिसका उद्देश्य आशा किरण में भीड़भाड़ कम करना है. इससे पहले कोर्ट ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय के सचिव को हाल ही में रोहिणी के दिल्ली में बौद्धिक रूप से विकलांग लोगों के लिए आश्रय गृह आशा किरण में कई कैदियों की मौत के संबंध में आश्रय गृह का दौरा करने का निर्देश दिया था.

मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के प्रति असंतोष व्यक्त किया, जिसमें फंड आवंटन के मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक उदासीन दृष्टिकोण को नोट किया गया. अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अदालत को आश्वासन दिया कि कार्रवाई तेजी से की जाएगी. दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि अगली सुनवाई तक एक नई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी. अदालत ने अगली सुनवाई 13 दिसंबर के लिए निर्धारित की है.

सचिव को सुनवाई में उपस्थित होने का दिया निर्देश

सुनवाई के दौरान पीठ ने कड़ी असहमति व्यक्त करते हुए कहा आप पर मामले की गंभीरता का कोई असर नहीं हुआ, 14 लोग मर चुके हैं आपको एमसीडी अधिकारी को बुलाकर उनसे सवाल पूछने चाहिए थे. इसके अलावा, अदालत ने समाज कल्याण विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया. इससे पहले अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को बिना किसी देरी के आशा किरण आश्रय गृह की तत्काल जरूरतों को पूरा करने का निर्देश दिया था.

स्थिति की निगरानी करेंगे समाज कल्याण सचिव

तत्काल और निराशा व्यक्त करते हुए अदालत ने सचिव को प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं पर तत्काल कार्रवाई को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया और इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय बाधाएं महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने में बाधा नहीं बननी चाहिए. पीठ ने सचिव से आपातकाल से निपटने के लिए अनुबंध पर नियुक्तियों सहित अतिरिक्त संसाधनों और कर्मचारियों का अनुरोध करने के लिए भी कहा. अदालत ने समाज कल्याण सचिव से यह आश्वासन दर्ज किया कि वह व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करेंगे.

आश्रय गृह में कमियों को दूर करें

अदालत ने कहा कि प्रयासों के बावजूद आश्रय गृह अभी भी 400 से अधिक कैदियों का सामना कर रहा है. पीठ ने इस बात पर प्रकाश डालते हुए स्थिति की गंभीरता पर जोर दिया कि मानव जीवन अमूल्य है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए. पीठ ने जोर देकर कहा कि सचिव आश्रय गृह में कमियों को दूर करने के लिए तेजी से काम करें, जिसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि सुविधाएं नजदीकी अस्पतालों से जुड़ी हों और इन स्थानों पर पूरी तरह सुसज्जित एम्बुलेंस तैनात हों. अदालत ने जोर देकर कहा कि यदि इन उपायों को लागू नहीं किया जाता है, तो जवाबदेही होनी चाहिए और प्रबंधन में बदलाव होना चाहिए.

–भारत एक्सप्रेस



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