हिंदी दिवस के अवसर पर भाजपा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा.
14 सितंबर 2025: देश में हिंदी और भारतीय भाषाओं के उत्थान का दौर चल रहा है. भाजपा नेता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा (Dr Dinesh Sharma) ने आज हिंदी दिवस के अवसर पर गुजरात में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि 2014 के बाद से मोदी सरकार ने भाषाओं के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं. महात्मा मंदिर कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित हिंदी दिवस 2025 एवं पांचवें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदी को व्यक्ति की जीवन आत्मा बताया.
देश में 44% लोग हिंदीभाषी
डॉ. दिनेश शर्मा, जो उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं, ने कहा कि आजादी के बाद भाषा और सीमाओं को लेकर कई विवाद हुए, लेकिन अब भारत की भाषाएं सहयात्री बनकर आगे बढ़ रही हैं. भारत जैसे बहुभाषी देश में 44% लोग हिंदी का प्रयोग करते हैं, क्योंकि हिंदी ने क्षेत्रीय भाषाओं को आत्मसात कर लिया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी अब देश की सीमाओं से बाहर भी बोली जा रही है, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है.
14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद से इसके उन्नयन के लिए निरंतर प्रयास हुए हैं. गुजरात में महात्मा गांधी, सरदार पटेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से भारत सरकार के 65 प्रतिशत कार्य हिंदी में हो रहे हैं, जबकि गृह मंत्रालय के सभी कार्य हिंदी में ही संपन्न होते हैं.

मोदी सरकार के प्रयास
डॉ. दिनेश शर्मा ने मोदी सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की शिक्षा हिंदी सहित क्षेत्रीय भाषाओं में दी जा रही है. जहां पहले केवल अंग्रेजी का बोलबाला था, वहां अब भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ रहा है. अर्थ प्रबंधन से लेकर नवीन प्रयोग तक हर क्षेत्र में अपनी भाषाओं का सम्मान हो रहा है. अब सरकारी पत्रों का उत्तर भी उसी भाषा में दिया जा रहा है, जो भाषाओं के उत्थान का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि देश में 22 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में राजभाषा का दर्जा और 11 भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का मान्यता मिली है.
हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं का समन्वय हो रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, तमिल, बांग्ला और हिंदी का संगम हो रहा है. बंगाल के लोग हिंदी भाषी क्षेत्रों में जाकर हिंदी सीख रहे हैं, जबकि हिंदी भाषी तमिलनाडु और अन्य राज्यों में जाकर स्थानीय भाषाओं से परिचित हो रहे हैं.
जीवन की आत्मा है भाषा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. दिनेश शर्मा ने भाषा को व्यक्ति के जीवन की आत्मा करार दिया. उन्होंने कहा कि भाषा ही उन्नति का द्वार खोलती है. बदले हुए समय में व्यक्ति के पास समय कम है, लेकिन जीवन में आज का आनंद लेना जरूरी है. धन सुख की गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन इंसानियत जरूर देती है. जीवन के उतार-चढ़ावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कवि नीरज की पंक्तियां उद्धृत कीं: “कर्म अगर अच्छा है तेरा, किस्मत तेरी दासी है, दिल है तेरा साफ तो प्यारे घर में मथुरा काशी है.” उन्होंने जोर दिया कि अच्छे कर्म से ही जीवन सुखमय बनता है.
सम्मान समारोह और अन्य वक्ता
इस अवसर पर डॉ. दिनेश शर्मा ने देशभर से आए हिंदी अधिकारियों, विद्वानों और भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया. कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल और वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने भी अपने विचार व्यक्त किए. राजभाषा विभाग की सचिव अंजली आर्य और विशेष सचिव मंजू शर्मा भी उपस्थित रहीं. सम्मेलन के सफल आयोजन पर विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने बधाई दी.
डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं की एकता को मजबूत करने का माध्यम बनेगा.
हिंदी दिवस के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि हिंदी न केवल राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास भाषाई विविधता को संरक्षित रखते हुए एकता को बढ़ावा देंगे.
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