कैंसर के इलाज में सही समय पर बीमारी की पहचान और मरीज की जरूरत के हिसाब से उपचार बेहद जरूरी है. इसी दिशा में चिकित्सा विशेषज्ञों को आधुनिक जांच तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ में चार दिवसीय मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी कार्यशाला की शुरुआत हुई है. 28 से 31 अक्टूबर तक चलने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों और प्रयोगशाला विशेषज्ञों को नई तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ उनका व्यावहारिक अनुभव भी उपलब्ध कराना है.
इस कार्यशाला का नाम ‘मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी एसेंशियल्स (MPE 2026)’ रखा गया है. इसका आयोजन अस्पताल के ऑन्कोपैथोलॉजी एवं मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी विभाग की ओर से किया जा रहा है. चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस मौके पर अस्पताल के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया भी मौजूद रहे. कार्यक्रम की जिम्मेदारी आयोजन अध्यक्ष डॉ. संकल्प सांचेती और आयोजन सचिव डॉ. सुशांत विनारकर संभाल रहे हैं.
मरीजों के लिए कैसे फायदेमंद है मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी?
कैंसर के इलाज में अब केवल बीमारी की पहचान करना ही काफी नहीं है. यह जानना भी जरूरी है कि कैंसर किस तरह का है और उसके पीछे कौन-से आनुवंशिक बदलाव जिम्मेदार हैं. मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी ऐसी ही जानकारी जुटाने में मदद करती है. इससे डॉक्टरों को मरीज की बीमारी को बेहतर ढंग से समझने और उसके लिए उपयुक्त उपचार चुनने में मदद मिल सकती है.
अस्पताल के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कहा कि आधुनिक कैंसर उपचार में मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है. इसके जरिए कैंसर से जुड़े आनुवंशिक बदलावों की पहचान की जा सकती है, जिससे मरीज की जरूरत के मुताबिक इलाज तय करने में सहायता मिलती है.
उन्होंने बताया कि कार्यशाला का मकसद चिकित्सा पेशेवरों को ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, जिसका इस्तेमाल वे अपने काम में कर सकें. इससे कैंसर की जांच की गुणवत्ता बेहतर बनाने और मरीजों को व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
डॉ. गुलिया के मुताबिक, इस तरह के प्रशिक्षण से उत्तर भारत में मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी की प्रयोगशालाओं को स्थापित करने और पहले से मौजूद सुविधाओं को मजबूत बनाने में भी सहायता मिलेगी. इससे लोगों को उन्नत जांच के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है. अस्पताल का लक्ष्य लोगों को उनके घर के नजदीक किफायती और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कैंसर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है.
कई राज्यों के विशेषज्ञ ले रहे हैं हिस्सा
इस चार दिवसीय कार्यशाला में पंजाब और चंडीगढ़ के अलावा दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों से भी चिकित्सा पेशेवर पहुंचे हैं. अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी से आधुनिक कैंसर जांच तकनीकों से जुड़े अनुभव और जानकारी साझा करने का अवसर मिलेगा.
कार्यशाला में केवल व्याख्यान ही नहीं होंगे, बल्कि प्रतिभागियों को प्रयोगशाला में काम करने और जांच की प्रक्रियाओं को करीब से समझने का मौका भी मिलेगा. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक चर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें कैंसर की जांच और उसके परिणामों को समझने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा होगी.
आधुनिक जांच तकनीकों का मिलेगा प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण मॉलिक्यूलर तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इनमें न्यूक्लिक एसिड एक्सट्रैक्शन, पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (PCR), डिजिटल ड्रॉपलेट PCR (ddPCR), सेंगर सीक्वेंसिंग और नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) शामिल हैं.
इन तकनीकों की मदद से कैंसर से जुड़े आनुवंशिक बदलावों का पता लगाने और जांच के नतीजों का विश्लेषण करने में सहायता मिलती है. प्रशिक्षण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रियाओं और जांच रिपोर्ट को सही तरीके से समझने पर भी जोर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा पेशेवर इन तकनीकों का इस्तेमाल अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें और जांच के निष्कर्षों को उपचार संबंधी फैसलों से जोड़ सकें.
हर साल होती हैं 3.15 लाख से ज्यादा जांचें
होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के ऑन्कोपैथोलॉजी विभाग में हर साल 3.15 लाख से अधिक जांचें की जाती हैं. इनमें हिस्टोपैथोलॉजी, साइटोपैथोलॉजी, हीमैटोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी और साइटोजेनेटिक्स से संबंधित जांचें शामिल हैं.
कार्यक्रम में डॉ. सुमन सिंह ने अस्पताल की ओर से मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सेवाओं की सराहना की. उन्होंने कहा कि अस्पताल में इलाज के साथ-साथ मरीजों को आर्थिक और सामाजिक सहायता भी उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाता है. उनके अनुसार, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहतर इलाज के साथ जरूरी सहयोग मिलना भी महत्वपूर्ण है.
डॉ. सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र में सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ का स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के साथ मिलकर दूर-दराज के इलाकों में कैंसर जांच की पहुंच बढ़ाने के लिए काम कर रहा है, ताकि बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सके.
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