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भारत में आएगी ब्रम्होस की बहन LORA! सुखोई के साथ निकाल देगी पाकिस्तान और चीन की हवा; जानें खासियत

India Defense Power: भारतीय वायुसेना ब्रम्होस के साथ LORA मिसाइल का उपयोग कर सकते है. आइये जानें आखिर क्या है इसकी खासियत और कैसे पाकिस्तान और चीन की हवा निकल जाएगी?

India Defense Power Lora Missile With Brahmos

Lora Missile

India Defense Power: पाकिस्तान के साथ तनाव और चीन के साथ लगातार चल रही अनबन के बीच भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार विकास कर रहा है. ऐसे में वायुसेना (IAF) ने एक नए और शक्तिशाली हथियार को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है. इस मिसाइल का नाम लोरा (LORA) है और इसे इजरायल ने तैयार किया है. यह मिसाइल अपनी लंबी दूरी और सटीकता के लिए जानी जाती है, जो दुश्मन के ठिकानों पर गहरे और सुरक्षित हमले करने में सक्षम है. ऐसे में माना जा रहा है कि अगर यह भारतीय वायुसेना में शामिल होती है तो सेना की ताकत में भी इजाफा होगा और ये ब्रह्मोस के साथ काम कर दुश्मन की कमर तोड़ देगी.

अभी भारत सुखोई विमान के साथ ब्रह्मोस का उपयोग करता है. हालांकि, हाल के दौर में उत्पन्न खतरों के कारण सेना और विकल्पों पर विचार कर रही है. इसी कारण चर्चा हो रही है कि शायद लोरा (LORA) को इसमें शामिल किया जा सकता है. आइये जानें क्या है इस मिसाइल की खासियत और ये भारत के लिए कैसे लाभदायक हो सकती है?

LORA को अपनाने की वजह

LORA मिसाइल एक सुपरसोनिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने बनाया है. इसकी रेंज 400-430 किमी है, जो इसे दुश्मन के गहरे ठिकानों पर हमला करने में सक्षम बनाती है. इसकी स्पीड लगभग 6,174 किमी/घंटा है, जो इसे एक शक्तिशाली हथियार बनाती है. भारतीय वायुसेना LORA मिसाइल को अपनाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद विचार कर ही है. रैम्पेज मिसाइल की सफलता ने IAF का लंबी दूरी की मिसाइलों पर भरोसा बढ़ा है.

  • 400-430 किमी की रेंज
  • 6,174 किमी/घंटे की स्पीड
  • 10 मीटर से कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल
  • फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक
  • हाई-वैल्यू टारगेट्स के लिए उपयुक्त

ब्रह्मोस और LORA दोनों अलग हैं

भारत के पास पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइल है, जो एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. हालांकि, LORA की अपनी विशेषताएं हैं जो इसे ब्रह्मोस से अलग बनाती हैं. ब्रह्मोस 290-450 किमी की रेंज के साथ मैक 2.8-3 की गति से उड़ती है. जबकि,  LORA एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है और ऊंची ट्रैजेक्टरी और स्पीड इसे दुश्मन के रडार को चकमा देने में मदद करती है. वहीं ब्रह्मोस अपनी लो-ऑल्टिट्यूड क्रूज क्षमता के साथ दुश्मन की एयर डिफेंस को भेदने में सक्षम है. ऐसे में एक बात साफ है कि लोरा ब्रह्मोस का विकल्प नहीं है बल्कि सेना इसे ब्राह्मण के पैरलल इस्तेमाल करने वाली है.

  • ब्रह्मोस एक संयुक्त भारत-रूस प्रोजेक्ट है
  • इसके लागत प्रति मिसाइल 20-30 करोड़ रुपये है
  • इसके निर्यात पर पाबंदी है
  • वहीं लोरा सस्ती और निर्यात करने योग्य
  • इसकी खरीद आसान है इसे स्टोर किया जा सकता है

अभी भारत बड़ी संख्या में सु-30 एमकेआई का उपयोग करता है. इसमें ब्रह्मोस को विशेष मॉड के साथ उपयोग किया जाता है. हालांकि, LORA काम को आसान बतानी है. इसे सु-30 एमकेआई जेट में बिना किसी बदलाव के सीधे उपयोग किया जा सकता है. हालांकि, भारी हमलों के लिए ब्रह्मोस काफी आगे है. जबकि, लोरा से हल्की, सटीक और लंबी दूरी के प्री-एम्प्टिव यानी हमले से पहले के निशाने लगाए जा सकते हैं. इसी कारण भारतीय वायुसेना LORA को ब्रह्मोस कंप्लीमेंट मान रही है.

भारत को मिलेगी मजबूत बढ़त

IAF, LORA मिसाइल को शामिल करने के लिए IAI और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ बातचीत कर रही है. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 2026-27 तक पहला स्क्वाड्रन (18 मिसाइलें) तैनात हो सकता है. यह कदम भारत को क्षेत्रीय शक्तियों (चीन और पाकिस्तान) के खिलाफ मजबूत करेगा और IAF की मारक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. LORA मिसाइल का भारत की सेना में शामिल होना नए युग की शुरुआत होगी. इसकी लंबी दूरी और सटीकता हमें रणनीतिक बढ़त दिलाएगी.

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पाकिस्तान और चीन को जवाब

पाकिस्तान का एयर डिफेंस और चीन की एडवांस्ड HQ-9 मिसाइल भारत के लिए एक चुनौती है. अगर युद्ध में दुश्मन के एयर डिफेंस को तोड़ना है तो पहले ब्रह्मोस और उसके बाद LORA के उपयोग से सटीक और गहरा हमला किया जा सकता है. ऐसे में LORA इन दोनों समस्याओं से बचने में भारत की मदद करेगी. इसे भारत और चीन से सटी सीमा में तैनात किया जा सकता है. इसके साथ ही इस मिसाइल को भारत में BEL की मदद से बनाया जा सकता है. इस कारण इससे भारत को तकनीकी और निर्यात का मौका मिल सकता है.



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