पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रप्रेम की एक अनूठी और मिसाल कायम करने वाली तस्वीर सामने आई है. सीमा पर कटीले तारों की बाड़ (फेंसिंग) लगाने के काम को पूरा करने के लिए स्थानीय हिंदू परिवारों ने स्वेच्छा से अपनी कीमती और उपजाऊ जमीन देश के नाम दान कर दी है. जमीन देने वाले इन ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब बात देश की सुरक्षा और भारत माता की आन-बान-शान की हो, तो जमीन का टुकड़ा बहुत छोटी चीज है. इस फैसले के बाद से सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय प्रशासन ने इन परिवारों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है.
क्यों पड़ी जमीन दान करने की जरूरत?
भारत और बांग्लादेश की सीमा के कई हिस्से ऐसे हैं जहां भौगोलिक परिस्थितियों या जमीनी विवाद के कारण अब तक फेंसिंग का काम पूरा नहीं हो पाया था. कटीले तार न होने की वजह से इन संवेदनशील इलाकों से घुसपैठ, तस्करी और असामाजिक तत्वों का आना-जाना बना रहता था. सरकार और प्रशासन लंबे समय से इस पैच को सुरक्षित करने की कोशिश में थे, लेकिन जमीन अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया में वक्त लग रहा था. देश की सुरक्षा में हो रही इस देरी को देखते हुए जलपाईगुड़ी और आसपास के सीमावर्ती इलाकों के हिंदू परिवारों ने खुद आगे आकर अपनी जमीन बिना किसी मुआवजे की शर्त के प्रशासन को सौंपने का फैसला किया, ताकि फेंसिंग का काम तुरंत शुरू हो सके.
‘यह जमीन-जायदाद से ऊपर भारत की बात है’
जमीन दान करने वाले स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे सालों से बॉर्डर पर होने वाली अवैध गतिविधियों को करीब से देखते आए हैं. बॉर्डर सुरक्षित रहेगा तो उनके परिवार और पूरा देश सुरक्षित रहेगा. एक ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा, “यह हमारी निजी जमीन या फायदे का सौदा नहीं है, यह सीधे तौर पर भारत की बात है. अगर सेना और देश को हमारी जमीन की जरूरत है, तो हम इसके लिए हमेशा तैयार हैं.” ग्रामीणों के इस कदम की सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में जमकर तारीफ हो रही है. इस जमीन पर अब बीएसएफ की देखरेख में तेजी से फेंसिंग लगाने का काम शुरू कर दिया गया है.
दुनिया की सबसे जटिल सीमाओं में से एक यह
अगर भौगोलिक दृष्टि से देखें, तो भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा बेहद लंबी और चुनौतीपूर्ण है. दोनों देशों के बीच कुल 4,096.7 किलोमीटर लंबी थल सीमा है. यह भारत की किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी सीमा रेखा है. वैश्विक स्तर पर बात की जाए, तो भारत-बांग्लादेश बॉर्डर दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी थल सीमा (Fifth-longest land border in the world) है. इस सीमा का एक बड़ा हिस्सा नदियों, घने जंगलों, पहाड़ों और दलदली इलाकों से होकर गुजरता है, जिसके कारण इसकी निगरानी करना बेहद कठिन काम माना जाता है.

घुसपैठ की चुनौती, सरकार के सुरक्षा इंतजाम
इस लंबी सीमा पर अवैध घुसपैठ, मवेशियों (गायों) की तस्करी, जाली नोटों का कारोबार और ड्रग्स की स्मगलिंग सुरक्षा बलों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है. हर साल सैकड़ों की संख्या में घुसपैठियों को बीएसएफ द्वारा सीमा पर पकड़ा जाता है.
इस घुसपैठ और तस्करी को पूरी तरह रोकने के लिए भारत सरकार ने कड़े और आधुनिक इंतजाम किए हैं:
स्मार्ट फेंसिंग और तकनीकी निगरानी: जिन इलाकों में कटीले तार लगाना संभव नहीं है (जैसे नदी वाले क्षेत्र), वहां सरकार ने ‘स्मार्ट फेंसिंग’ यानी ‘व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली’ (CIBMS) लागू की है. इसके तहत थर्मल इमेजर, इंफ्रा-रेड सेंसर, अंडर-वॉटर सोनार और आधुनिक कैमरों से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाती है.
बॉर्डर आउटपोस्ट की संख्या में बढ़ोतरी: सीमा पर जवानों की तैनाती और गश्त को मजबूत करने के लिए लगातार नई चौकियां (फ्लोटिंग बीओपी सहित) बनाई जा रही हैं.
स्थानीय लोगों के साथ समन्वय: घुसपैठ रोकने में सीमावर्ती गांवों के लोगों की भूमिका अहम होती है, और यही वजह है कि आज ग्रामीणों के सहयोग से बॉर्डर को अभेद्य बनाने का मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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