आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने 2025 वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत के 118वें स्थान पर आने पर निराशा जताई. उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत सामाजिक एकता, सहयोग और मानवीय मूल्यों को देखते हुए देश को कहीं बेहतर स्थान मिलना चाहिए था.
रविशंकर ने इस रैंकिंग की आलोचना करते हुए कहा, “भारत 118वें स्थान पर है, जबकि कई संघर्षग्रस्त देश हमसे ऊपर हैं. यह तर्क कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में ज्यादा सामाजिक जुड़ाव होता है, पूरी तरह सही नहीं है. केवल जुड़ाव ही काफी नहीं है, खुशी सूचकांक में भारत की स्थिति कहीं बेहतर होनी चाहिए.”
भारत में मानवता और सहयोग की भावना
उन्होंने कहा, “मैंने पूरी दुनिया का दौरा किया है और देखा है कि भारत में मानवीय मूल्य बहुत ऊंचे हैं. यहां करुणा, मेहमानों का सत्कार और संसाधनों को साझा करने की अद्भुत परंपरा है. अगर किसी परिवार पर कोई मुसीबत आती है, तो पूरा गांव उसकी मदद के लिए आगे आता है. इस तरह की सामाजिक एकजुटता भारत में बहुत मजबूत है.”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत में कुछ चुनौतियां हैं. लेकिन उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक में देश में जबरदस्त सुधार हुआ है. गरीबी को खुशी या दुख से जोड़कर नहीं देखा जा सकता.”
पाकिस्तान भारत से आगे, फिर भी मानवाधिकार संकट में
गौरतलब है कि पाकिस्तान को भारत से ऊपर 109वां स्थान मिला, जबकि वहां बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है. शुक्रवार को जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 58वें सत्र में बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के समन्वयक नियाज बलूच ने पाकिस्तान पर राजनीतिक असहमति को दबाने और बलूचिस्तान में अत्याचार करने का आरोप लगाया.
कौन जारी करता है वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स?
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर, गैलप, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (UN-SDSN) और स्वतंत्र संपादकीय बोर्ड द्वारा प्रकाशित किया जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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