प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप. (फाइल फोटो)
अमेरिका की ओर से भारत के ऊपर रूस से तेल खरीदने के चलते जुर्माने के तौर पर 25 फीसदी टैरिफ (Tariff) लगाया है, जिसके बाद कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया है. भारत पर लगे इस हाई टैरिफ की वजह से अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों के लिए कंपटीशन काफी बढ़ गया है. भारतीय एक्सपोर्टर्स का वियतनाम, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों के सामने खड़े रहना काफी मुश्किल हो रहा है.
Tariff का तोड़ निकालने में जुटा भारत
इन परेशानियों के बीच भारत अब यूरोपीय यूनियन के साथ अपने रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश में जुटा हुआ है. यूरोपीय यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच चल रहे मतभेदों को दूर करने के लिए अगले महीने दो बैठकें होने वाली हैं.
दिल्ली का दौरा करेगा EU डेलिगेशन
इतना ही नहीं, यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों का एक डेलिगेशन इसी सप्ताह नई दिल्ली का दौरा करने वाला है. इस दौरे का मकसद उन मुद्दों को सुलझाना है, जो मुक्त व्यापार समझौते में बाधा बन रहे हैं, जिसमें मार्केट एक्सेस, कृषि उत्पादों पर सीमा शुल्क और खासकर शराब और डेयरी शामिल है.
भारत और यूरोपीय यूनियन की तरफ से ये कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं, जब पूरी दुनिया में ट्रंप के टैरिफ को लेकर उथल-पुथल मची हुई है, व्हाइट हाउस ने भारत पर 50 फीसदी का भारी-भरकम टैरिफ लगाया है, और यूरोपीय यूनियन पर दबाव बना रहा है कि रूस से तेल खरीदने के चलते वो भी भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए.
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भारत और यूरोपीय यूनियन चाहते हैं, कि इस बातचीत के जरिए इस साल के अंत तक सभी मुद्दे सुलझा लिए जाएं, क्योंकि ट्रंप के टैरिफ की वजह से नई दिल्ली एक नए बाजार की तलाश कर रही है. बता दें कि यूरोपीय यूनियन भारत का एक बड़ा और अहम व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में करीब 135 बिलियन डॉलर के के पार जा चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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