Indian Vessel Jag Laadki Arrives At Gujarat Port: पश्चिम एशिया में मचे भीषण कोहराम और समुद्र में बरसती मिसाइलों के बीच भारत के लिए राहत की एक और बड़ी खबर आई है. भारतीय ध्वज वाला विशालकाय तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ (Jag Laadki) रविवार को यूएई के फुजैराह पोर्ट से करीब 80,800 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया है.
बता दें कि यह जहाज न केवल युद्ध क्षेत्र से बाहर निकला है, बल्कि इसने ईरान के उस ड्रोन हमले को भी बेहद करीब से देखा है जिसने फुजैराह ऑयल टर्मिनल को दहला दिया था. ‘जग लाडकी’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तनावपूर्ण जलमार्ग को पार करने वाला चौथा भारतीय जहाज बन गया है.
‘मौत के रास्ते’ से कैसे निकला जहाज?
‘जग लाडकी’ की यह यात्रा किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं रही. शनिवार को जब यह जहाज फुजैराह पोर्ट पर तेल की लोडिंग कर रहा था, तभी ईरान ने वहां भीषण ड्रोन हमला कर दिया. हमले के कारण पोर्ट पर आग लग गई और अफरा-तफरी मच गई, लेकिन गनीमत रही कि इस हमले में ‘जग लाडकी’ और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित रहे. हमले के अगले ही दिन हौसला दिखाते हुए जहाज ने पोर्ट छोड़ा और दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का सीना चीरते हुए भारत की ओर बढ़ गया.
भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का दिखा जलवा
युद्ध के 18वें दिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी और इजरायली जहाजों के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है, लेकिन भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग की गारंटी दी है. ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा.
यही वजह है कि जहां दुनिया भर के टैंकर खाड़ी में फंसने के डर से कांप रहे हैं, वहीं भारत के ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’ और अब ‘जग लाडकी’ जैसे जहाज सफलतापूर्वक अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं. हालांकि, भारत ने ईरान की उस कथित शर्त को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें सुरक्षित मार्ग के बदले जब्त टैंकरों की रिहाई की बात कही गई थी.
ये भी पढ़ें: इंदौर में भीषण आग, इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से शॉर्ट सर्किट, 7 लोगों की मौत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कितने जहाज फंसे हैं?
भारत के लिए यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी जरूरत का करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है. शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 22 मर्चेंट जहाज मौजूद हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं. सरकार इन सभी की सुरक्षित वापसी के लिए ईरान के साथ लगातार संपर्क में है. ‘जग लाडकी’ (Jag Laadki) का सुरक्षित आना इस बात का प्रतीक है कि वैश्विक तनाव के बीच भी भारत की कूटनीति और उसका तिरंगा समुद्र में सबसे सुरक्षित ढाल बना हुआ है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




