AI के मदद से बनाई गई तस्वीर
देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में मोदी सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 से अब तक देशभर में लगभग 5.96 लाख नए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं. इसके साथ ही बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया गया है, जिससे कुल क्षमता अब 8.64 लाख कनेक्शनों तक पहुंच गई है.
नए कनेक्शन के लिए उत्साह
मंत्रालय ने बताया कि पीएनजी के प्रति लोगों में जबरदस्त दिलचस्पी देखी जा रही है. अब तक लगभग 6.66 लाख नए उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. खास बात यह है कि 1 मई तक 43,350 से ज्यादा लोगों ने पीएनजी मिलने के बाद अपने पुराने एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन को सरेंडर कर दिया है. यह दर्शाता है कि लोग अब पारंपरिक सिलेंडरों के बजाय सीधे पाइप से आने वाली गैस को प्राथमिकता दे रहे हैं.
छोटे सिलेंडरों की बढ़ी मांग
सिर्फ पीएनजी ही नहीं, बल्कि 5 किलोग्राम वाले छोटे एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडरों की बिक्री में भी बड़ा उछाल आया है. अप्रैल 2026 से अब तक 22.78 लाख से ज्यादा ऐसे सिलेंडर बेचे गए हैं. सरकारी तेल कंपनियों ने लोगों को जागरूक करने के लिए 9,980 से ज्यादा कैंप लगाए, ताकि छोटे सिलेंडर की पहुंच बढ़ सके. इसके अलावा, कमर्शियल गैस और ऑटो एलपीजी की बिक्री में भी बढ़त दर्ज की गई है.
पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पर्याप्त
ईंधन की सप्लाई को लेकर सरकार ने आम जनता को भरोसा दिलाया है. मंत्रालय का कहना है कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल का भी भरपूर स्टॉक मौजूद है. सरकार ने साफ किया है कि कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण लोग डरकर ज्यादा खरीदारी (पैनिक बाइंग) कर रहे हैं, जबकि तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से चल रहे हैं.
उद्योगों को मिल रही है भरपूर मदद
घरेलू जरूरतों के अलावा सरकार उद्योगों का भी पूरा ध्यान रख रही है. फर्टिलाइजर प्लांट्स को उनकी जरूरत का लगभग 98 प्रतिशत गैस सप्लाई किया जा रहा है. साथ ही, केमिकल और फार्मा सेक्टर को कच्चा माल सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्य समूह (JWG) बनाया गया है. पिछले कुछ दिनों में मुंबई और गुजरात जैसी रिफाइनरियों से भारी मात्रा में प्रोपिलीन और ब्यूटाइल एक्रिलेट जैसे जरूरी केमिकल उद्योगों को भेजे गए हैं.
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