भारत ने ड्रोन हमलों से निपटने के लिए स्वदेशी तकनीक पर आधारित एक नया हथियार “भार्गवास्त्र” विकसित किया है. भार्गवास्त्र, दरअसल भगवान परशुराम का दिव्यास्त्र है, जो द्वापर युग में इस्तेमाल किया गया था. धर्मग्रंथों में इस दिव्यास्त्र को बहुत विनाशकारी माना गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 जनवरी 2025 को भारतीय वैज्ञानिकों ने “भार्गवास्त्र” का सफल परीक्षण किया था. यह एक गाइडेड माइक्रो म्यूनिशन काउंटर ड्रोन सिस्टम है, जिसे इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (ईईएल) और सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है. यह हथियार ड्रोन झुंडों को सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम है, जो आधुनिक युद्ध में एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं.
इस हथियार के परीक्षण की तस्वीर में समुद्र तट के पास एक संरचना दिखाई देती है, जिसके सामने “भार्गवास्त्र” का बोर्ड लगा है. इस बोर्ड पर लिखा है कि यह सिस्टम माइक्रो रॉकेट तकनीक पर आधारित है और ड्रोन हमलों को प्रभावी ढंग से रोक सकता है. यह हथियार भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि ड्रोन तकनीक का उपयोग आतंकी गतिविधियों और सीमा पर हमलों के लिए बढ़ रहा है.
“भार्गवास्त्र” की खासियत इसकी सटीकता और हल्कापन है, जो इसे विभिन्न युद्ध परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है. यह प्रणाली भारतीय सेना को कम लागत में उच्च प्रभावशीलता प्रदान करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह हथियार आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा और वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा तकनीक को पहचान दिलाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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