Cancer Treatment: भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है. थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग (DECE) के दो वरिष्ठ प्रोफेसरों ने स्वदेशी हाइपरथर्मिया एप्लीकेटर विकसित किया है. यह अत्याधुनिक उपकरण भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रायोजित एक महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत विकसित किया गया है.
इस परियोजना के मुख्य रिसर्चर डॉ. राजेश खन्ना तथा को-रिसर्चर डॉ. मयंक कुमार राय हैं. यह टीम भारत में पहली बार सुपरफिशियल कैंसर के उपचार हेतु एक स्वदेशी हाइपरथर्मिया प्रणाली विकसित कर रही है जो चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है.
कैसे काम करती है तकनीक?
हाइपरथर्मिया तकनीक के अंतर्गत कैंसर प्रभावित ऊतकों को नियंत्रित तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायता मिलती है. यह तकनीक रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की प्रभावशीलता को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है.
भारत एक्सप्रेस को वैज्ञानिकों ने क्या बताया?
वैज्ञानिकों ने भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क से विशेष बातचीत में बताया कि यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और शीघ्र ही इसे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC), पटियाला में मानव ऊतकों पर परीक्षण के लिए स्थानांतरित किया जाएगा. यह परीक्षण प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राजा बेनीपाल के मार्गदर्शन में किए जाएंगे.
इस बहु-संस्थागत शोध परियोजना में नानावटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नागराज भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं. उनका क्लीनिकल मार्गदर्शन इस तकनीक को प्रयोगशाला से मरीजों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है.
मेक इन इंडिया अभियान होगा मजबूत
डॉ. खन्ना और डॉ. राय ने विश्वास जताया कि यह स्वदेशी तकनीक न केवल मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि भविष्य में भारत को मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान में गदर! ल्यारी की आवाज पर हिला इस्लामाबाद, मौलाना ने की मुनीर की बेइज्जती; भारत की तारीफ में क्या बोले?
इस अवसर पर थापर इंस्टीट्यूट के कुलपति एवं रजिस्ट्रार ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की मजबूत अनुसंधान संस्कृति, अंतर्विषयी सहयोग और समाजोपयोगी नवाचारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. इसके साथ ही वैज्ञानिक वीएलएसआई डिजाइन और माइक्रोवेव इंजीनियरिंग जैसे उन्नत क्षेत्रों में भी अपने शोध कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
