रिपोर्ट- अरविंद
पोरबंदर के तट पर आज एक ऐसा मंजर दिखने वाला है, जिसे देखकर लगेगा कि वक्त का पहिया 2000 साल पीछे घूम गया है. आप कल्पना कीजिए, एक ऐसा जहाज जो समुद्र की लहरों को चीरने के लिए तैयार है, लेकिन ना तो उसमें कोई आधुनिक इंजन है, ना दिशा बताने वाला जीपीएस (GPS) और हैरानी की बात तो यह है कि इसे बनाने में एक भी लोहे की कील का इस्तेमाल नहीं किया गया है.
हम बात कर रहे हैं INSV कौंडिन्य की जो आज गुजरात के पोरबंदर से ओमान की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा के लिए रवाना हो रहा है. यह जहाज भारत के गौरवशाली समुद्री इतिहास की मिसाल है.
अजंता की गुफाओं से निकलकर लहरों तक का सफर
इस जहाज की सबसे खास बात इसकी बनावट है. इसका डिजाइन 5वीं शताब्दी के उन व्यापारिक जहाजों से प्रेरित है, जिन्हें हम अजंता की गुफाओं की दीवारों पर बनी पेंटिंग्स में देखते आए हैं. गोवा की कंपनी ‘होडी इनोवेशन्स’ ने इसे उसी 2000 साल पुरानी तकनीक से तैयार किया है, जिसे ‘स्टिच्ड शिपबिल्डिंग’ (Stitched Shipbuilding) कहा जाता है. इसमें लकड़ी के बड़े-बड़े तख्तों को नारियल की रस्सियों से सिला गया है और नेचुरल ग्लू (गोंद) से सील किया गया है.
सिर्फ हवा का भरोसा
65 फीट लंबे और करीब 50 टन वजनी इस जहाज को चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है. इसमें कोई आधुनिक मशीनरी नहीं लगी है. यह पूरी तरह से सूती कपड़े के चौकोर पर्दों (Cotton Sails) और चप्पू (Oars) के दम पर चलेगा. यानी यह पूरी तरह प्रकृति और हवा के रुख पर निर्भर होगा. पोरबंदर से ओमान के बीच का 1400 किलोमीटर का यह सफर करीब 15 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है.
कौन थे ‘कौंडिन्य’?
इस जहाज का नाम प्राचीन भारत के महान नाविक ‘कौंडिन्य’ के सम्मान में रखा गया है. इतिहास बताता है कि कौंडिन्य ने ही दक्षिण-पूर्व एशिया की साहसिक यात्रा की थी और फुनान साम्राज्य की नींव रखी थी. यह प्रोजेक्ट संस्कृति मंत्रालय और भारतीय नौसेना की एक साझा कोशिश है, जिसका मकसद दुनिया को यह बताना है कि जब दुनिया को समुद्र का रास्ता नहीं पता था, तब भारत के पास जहाज बनाने का बेजोड़ हुनर था.
क्रू मेंबर्स के लिए बड़ी चुनौती
इस ऐतिहासिक सफर पर 13 नाविक और 3 नौसेना अधिकारी सवार होंगे. वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कृष्णा स्वामीनाथन इस मिशन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. चूंकि आज के दौर में किसी भी नाविक को बिना इंजन और बिना जीपीएस के जहाज चलाने का अनुभव नहीं है, इसलिए इस दल को पिछले कई महीनों से कड़ी ट्रेनिंग दी गई है. यह मिशन सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की उस पुरानी समुद्री विरासत को फिर से जीने की कोशिश है जो समय के साथ धुंधली हो गई थी.
यह जहाज गुजरात और ओमान के बीच के उसी प्राचीन ट्रेड रूट (व्यापारिक मार्ग) को फिर से जीवंत करेगा, जिस पर सदियों पहले भारतीय व्यापारी मसालों और कपड़ों का व्यापार किया करते थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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