भारत की ‘युवा शक्ति’ ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा दिया है. कोलंबिया के बुकामांगा में आयोजित प्रतिष्ठित 56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) 2026 में भारतीय टीम ने वो कर दिखाया है जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है. भारत की पांच सदस्यीय टीम के सभी पांचों जांबाज छात्रों ने इस ग्लोबल प्रतियोगिता में क्लीन स्वीप करते हुए पांचों स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए हैं.
इस अकल्पनीय और कड़क प्रदर्शन की बदौलत भारत अब चीन, कजाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे ताकतवर मुल्कों के साथ संयुक्त रूप से विश्व में नंबर-1 के सिंहासन पर काबिज हो गया है. साल 2018 के बाद यह दूसरा ऐसा ऐतिहासिक मौका है जब भारतीय टीम के सभी सदस्य सोना लेकर स्वदेश लौट रहे हैं.
An outstanding performance by our youngsters!
Congratulations to the Indian contingent of Kanishk Jain, Riddhesh Anant Bendale, Rishit Garg, Shresth Suraiya and Svarit Joshi for winning Gold Medals at the 56th International Physics Olympiad (IPhO) 2026 held in Bucaramanga,… pic.twitter.com/oiAVLy110P
— Narendra Modi (@narendramodi) July 13, 2026
इन 5 शेरों ने किया कमाल
इस ऐतिहासिक और गौरवशाली जीत पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भारतीय युवाओं की इस अद्भुत उपलब्धि पर गहरा गर्व व्यक्त किया है. पीएम मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि हमारे युवाओं का यह शानदार प्रदर्शन ‘युवा शक्ति’ की असीम संभावनाओं और विज्ञान व अनुसंधान के प्रति उनके अटूट जुनून का जीता-जागता प्रतीक है.
देश का मान बढ़ाने वाले इन जांबाज स्वर्ण पदक विजेताओं में पुणे के कनिष्क जैन, इंदौर के ऋद्धेश अनंत बेंदले, द्वारका (नई दिल्ली) के ऋषित गर्ग, मुंबई के श्रेष्ठ सुरैया और अहमदाबाद के स्वरित जोशी शामिल हैं. इन छात्रों ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर दुनिया के 85 देशों से आए 381 सबसे तेज दिमाग वाले छात्रों को पीछे छोड़ते हुए तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है.
भारतीय वैज्ञानिकों की देखरेख में मिली ऐतिहासिक फतेह
5 से 12 जुलाई 2026 तक चली इस बेहद कठिन और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कुल 51 स्वर्ण पदक बांटे गए, जिनमें से 5 अकेले भारत के खाते में आए. इस ओलंपियाड की सैद्धांतिक परीक्षा इतनी कठिन थी कि इसमें थर्मोडायनामिक्स ऑफ पैरामैग्नेटिक कूलिंग, कॉफी कप में प्रकाश के परावर्तन से जुड़े कैस्टिक्स, ओजोन के फोटोआयनाइजेशन और इलेक्ट्रॉन-पोजीट्रॉन पेयर्स की जटिल गतिशीलता जैसे सिर घुमा देने वाले वैज्ञानिक विषय शामिल थे. लेकिन भारतीय टीम के कुशल नेतृत्वकर्ता प्रो. अन्वेष मजूमदार (HBCSE-TIFR, मुंबई) और डॉ. लीना जोशी के साथ-साथ वैज्ञानिक पर्यवेक्षक प्रो. आनंद दासगुप्ता और सुश्री निशा केलकर के कड़े और शानदार मार्गदर्शन ने छात्रों की राह को बेहद आसान बना दिया.
‘विकसित भारत’ के विजन को मिली नई उड़ान
इस महा-सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष श्री अजित कुमार मोहंती ने कहा कि यह ऐतिहासिक परिणाम भारतीय छात्रों की कुशाग्र वैज्ञानिक सोच और होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE-TIFR) के ओलंपियाड कार्यक्रम के दशकों के निरंतर प्रयासों का ही शानदार नतीजा है.
बताते चलें HBCSE के निदेशक प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने भी इस बात पर जोर दिया कि मजबूत संस्थागत सहयोग ने भारत को वैश्विक मंच पर एक अजेय शक्ति बना दिया है. पिछले एक दशक में भारतीय छात्रों ने इस प्रतियोगिता के हर संस्करण में पदक जीतकर देश में विज्ञान शिक्षा की मजबूत नींव को साबित किया है, जो आने वाले समय में ‘विकसित भारत’ के सपने को सच करने का सबसे बड़ा आधार बनने वाला है.
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-भारत एक्सप्रेस
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