Bharat Express DD Free Dish

IRIS डेना पर हमले से पहले ईरान ने दूसरे जहाज के लिए मांगी थी मदद, भारत ने कराया डॉक; क्या बदल रहा है इंडिया का स्टैंड?

ईरान-इजरायल तनाव के बीच तकनीकी खराबी के कारण ईरानी जहाज IRIS Lavan को भारत ने कोच्चि बंदरगाह पर आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति दी. उसी दिन हिंद महासागर में अमेरिकी हमले में ईरान का युद्धपोत IRIS Dena डूब गया, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया…

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिका ने भारत से लौट रहे एक ईरानी जहाज(IRIS Dena) को निशाना बनाया था. जिसके बाद से ईरान समर्थित पखवाड़े में भारत के रुख का जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा था. अब खबर निकल कर के आ रही है कि उसी दिन एक अन्य ईरानी जहाज को भारत ने अपनी बंदरगाह पर डॉक कराया था. जानकारी के मुताबिक, भारत की समुद्री सीमा में मौजूद ईरानी जहाज में तकनीकी खारबी के चलते आपातकालीन स्थिति में कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी गई थी. यह अनुमति तो 1 मार्च को दी गई लेकिन ईरानी जहाज ठीक उसी दिन भारत पहुंचा जब श्रीलंका के निकट एक अमेरिकी जहाज ने उसके अन्य जहाज को निशाना बनाया था. यह जहाज 183 क्रू मेंबर्स के साथ कोच्चि पहुंचा और फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है.

जानिए क्या है पूरा घटनाक्रम?

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला शुरू किया, जिसके ठीक उसी दिन ईरानी जहाज आइरिस लावन (IRIS Lavan) ने भारत से शरण मांगी क्योंकि उसे तकनीकी खराबी हो गई थी और वह भारतीय समुद्री सीमा के क्षेत्र में था. भारत ने इस अनुरोध पर 1 मार्च को डॉकिंग की अनुमति दे दी, लेकिन जहाज कोच्चि बंदरगाह पर 4 मार्च को पहुंचा. इसी 4 मार्च को ही अमेरिकी हमले में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena भारतीय महासागर में श्रीलंका के तट से दूर डूब गया, जिसमें 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए.

बता दें कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से किसी दुश्मन जहाज को डुबोने का पहला मामला था. ज्ञात रहे आइरिस लावन एक Hengam-क्लास लैंडिंग शिप है और पहले भी एक्सरसाइज के लिए भारत आ चुके हैं, अब कोच्चि में सुरक्षित है. उसके 183 क्रू सदस्यों को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है, जबकि IRIS Dena की त्रासदी ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है. भारत ने दोनों ही मामलों में मानवीय और तकनीकी आधार पर मदद की, लेकिन घटनाओं का समय संयोग से ऐसा रहा कि IRIS Lavan का डॉकिंग ठीक उसी दिन हुआ जब उसका साथी जहाज डूबा.

आइरिस लावन (IRIS Lavan) में क्या खराबी थी?

सूत्रों के अनुसार आइरिस लावन में तकनीकी समस्याएं आ गई थीं. ईरानी पक्ष ने आपातकालीन डॉकिंग का अनुरोध किया था. जिसकी भारत ने 1 मार्च को अनुमति दे दी. जहाज पर 183 चालक दल के सदस्य थे, जो फिलहाल कोच्चि में नौसेना परिसरों में ठहरे हुए हैं.

IRIS डेना पर अमेरिकी हमला

जिस दिन भारत में आइरिस लावन डॉक हुआ उसी दिन अमेरिका ने ईरान के अन्य जहाज को निशाना बनाया. हिंद महासागर में श्रीलंका के पास अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाया, जिससे जहाज डूब गया और हमले में कम से कम 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए. इसको लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह एक प्रशिक्षण जहाज था और भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित बहुपक्षीय अभ्यास मिलान में भाग लेने के बाद लौट रहा था.

एक अन्य जहाज IRIS Bushehr श्रीलंका में

एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Bushehr श्रीलंका में मौजूद था. तकनीकी खराबी आने के बाद श्रीलंका नौसेना ने 200 से अधिक नाविकों को सुरक्षित किनारे पर पहुंचाया. नाविकों को कोलंबो के पास वेलिसारा नेवल बेस में रखा गया है. श्रीलंका नौसेना के अधिकारी जहाज पर मदद के लिए मौजूद हैं. जहाज को बाद में पूर्वी श्रीलंका के त्रिंकोमाली बंदरगाह ले जाया जा सकता है.

क्या बदल रहा है भारत का स्टैन्ड?

भारत ने अभी तक इजरायल-ईरान युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है, लेकिन मानवीय आधार पर ईरानी जहाज को शरण दी गई है. यह कदम भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति को दर्शाता है जोकि इजरायल के साथ-साथ ईरान को भी खोना नहीं चाहता क्योंकि भारत का ईरान हमेशा से बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read