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एक आदमी को गिनने में कितना का होगा खर्च? भारत की पहली डिजिटल जनगणना, 11,718 करोड़ का बजट पास

India Census 2027: भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपए का बजट पास किया है. मौजूदा आबादी 147 करोड़ मानकर अनुमान लगाया गया है कि एक नागरिक को गिनने पर करीब 80 रुपए खर्च होंगे.

India Census 2027: अगले साल से देश में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. सरकार ने इसके लिए बड़ा बजट पास कर दिया है. अनुमान के मुताबिक मौजूदा समय में भारत की आबादी करीब 147 करोड़ है. वहीं जनगणना के लिए सरकार ने 11,718 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट तय किया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक नागरिक को गिनने में सरकार कितना खर्च करेगी.

मौजूदा आबादी का हाल

जब भी देश की जनसंख्या की बात होती है तो अक्सर लोग 140 करोड़ का आंकड़ा ही बोलते हैं लेकिन हकीकत इससे आगे निकल चुकी है. वर्ल्डोमीटर के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्या इस समय लगभग 147 करोड़ है और यह लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि जब जनगणना शुरू होगी तब तक यह आंकड़ा और भी बड़ा हो जाएगा.

सरकार ने पास किया बजट

कैबिनेट मीटिंग में जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट पास किया गया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास बताया. यह भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी.

इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा-

  • पहला चरण: मकानों की सूची और आवास जनगणना (अप्रैल से सितंबर 2026)
  • दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)

बर्फ से ढके इलाकों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी.

पहली डिजिटल जनगणना

जनगणना 2027 खास होगी क्योंकि यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी. इसके लिए एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किया गया है. साथ ही एक सेंट्रल सेन्सस मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) पोर्टल बनाया गया है, जिससे पूरे प्रोसेस को रियल टाइम में ट्रैक किया जा सकेगा. बेहतर योजना के लिए हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (HLB) क्रिएटर वेब मैप एप्लिकेशन का भी इस्तेमाल होगा.

30 लाख कर्मचारी होंगे मैदान में

इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारी तैनात किए जाएंगे. इनमें जनगणनाकर्मी, पर्यवेक्षक, मास्टर ट्रेनर और जिला अधिकारी शामिल होंगे. ज्यादातर जनगणनाकर्मी सरकारी शिक्षक होंगे, जिन्हें उनकी नियमित जिम्मेदारियों के साथ यह काम भी करना होगा और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाएगा. निगरानी और समन्वय के लिए जिला और राज्य स्तर पर भी अतिरिक्त कर्मचारी लगाए जाएंगे. खास बात यह है कि इस बार जनगणना में जाति संबंधी आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किए जाएंगे.

एक नागरिक पर कितना खर्च?

अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर. सरकार ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपए का बजट तय किया है. अगर मौजूदा आबादी यानी 147 करोड़ को आधार मानें तो एक नागरिक को गिनने पर सरकार का खर्च लगभग 80 रुपए बैठेगा. हालांकि यह सिर्फ अनुमान है, क्योंकि जनगणना शुरू होने तक आबादी और खर्च दोनों में बदलाव संभव है.

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जनगणना 2027 न सिर्फ भारत की सबसे बड़ी जनगणना होगी बल्कि यह पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी. करोड़ों लोगों को गिनने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च होंगे और लाखों कर्मचारी मैदान में उतरेंगे. अनुमान के मुताबिक सरकार को हर नागरिक को गिनने में करीब 80 रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं. यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे लेकिन जब इसे पूरे देश की आबादी पर लागू किया जाए तो यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास बन जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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