ACB Raid In Jammu Kashmir: राजौरी/रवि शर्मा: जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बुधवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. ACB की टीमों ने केंद्र शासित प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के भाई और पुलिस इंस्पेक्टर विजय चौधरी से जुड़े कई परिसरों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई हाल ही में दर्ज किए गए ‘आय से अधिक संपत्ति’ (Disproportionate Assets) के मामले में की जा रही है.
तड़के जम्मू से राजौरी तक छापेमारी
ACB की टीमों ने बुधवार तड़के सुबह विजय चौधरी के दो प्रमुख ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया. संतोक विहार, कालूचक-कुंजवानी स्थित निजी आवास के साथ ही राजौरी के नौशेरा स्थित उनका पुश्तैनी घर में छापे मारे गए. सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ों, बैंक रिकॉर्ड और निवेश के कागजात खंगाले जा रहे हैं.
कौन हैं विजय चौधरी और क्या है मामला?
विजय चौधरी जम्मू-कश्मीर पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आय से अधिक संपत्ति जुटाने का केस दर्ज किया गया है. जानकारी के अनुसार, 16 सितंबर 2025 को विजय चौधरी का तबादला लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लिए किया गया था. हालांकि, उन्होंने ‘मेडिकल ग्राउंड’ का हवाला देते हुए निर्धारित तिथि तक वहां जॉइन नहीं किया था, जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे थे.
डिप्टी CM बोले- किया जा रहा परेशान
अपने भाई के घर हुई रेड पर उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष और अधिकारियों की मनमानी करार दिया. सुरिंदर चौधरी ने कहा कि विजय एक ईमानदार अधिकारी हैं जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ फ्रंटलाइन पर लड़ाई लड़ी है और कई आतंकियों को मार गिराया है. जो अधिकारी देश के लिए लड़ा हो, उसे इस तरह परेशान करना गलत है.
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डिप्टी सीएम ने कुछ अधिकारियों पर किसी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मैं कुछ अधिकारियों को बताना चाहता हूं कि समय बदलते देर नहीं लगती. उन्होंने आरोप लगाया कि विजय की प्रमोशन की फाइल लंबे समय से जानबूझकर रोकी गई थी और अब उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन अंत में कुछ भी बरामद नहीं होगा.
Jammu Kashmir में अब आगे क्या होगा?
फिलहाल ACB की छापेमारी और पूछताछ जारी है. एजेंसी की ओर से अभी तक बरामदगी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. इस कार्रवाई ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में ‘सत्ता बनाम ब्यूरोक्रेसी’ की एक नई बहस छेड़ दी है.
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