रिपोर्ट- सुनील शर्मा
Kalyan Dombivli Mayor Race: कल्याण–डोंबिवली में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है, उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के नवनिर्वाचित नगरसेवकों के अचानक नॉट-रिचेबल होने से खलबली मच गई है. इस मामले को गंभीर मानते हुए कोळसेवाड़ी पुलिस थाने में मिसिंग की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है. विपक्ष ने सत्ताधारियों पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
शिवसेना (UBT) के 4 पार्षद लापता
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना (UBT) के कुल 11 नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से चार नगरसेवक फिलहाल संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं. इनमें से नगरसेवक मधुर उमेश म्हात्रे और कीर्ति राजन ढोणे बीते 16 जनवरी से नॉट-रिचेबल हैं. इस संबंध में कल्याण पूर्व जिला प्रमुख शरद पाटील के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों ने कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत में नगरसेवकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है और अपहरण, दबाव या बहला फुसलाने की आशंका भी व्यक्त की गई है. ठाकरे गुट की ओर से मांग की गई है कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स सहित तकनीकी जांच कर तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू करे, ताकि लापता नगरसेवकों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके.
नेता ने की अपील
इस दौरान शिवसेना (UBT) के नेता शरद पाटील ने नॉट-रिचेबल नगरसेवकों से अपील करते हुए कहा कि, अगर आप सुरक्षित हैं तो जहां भी हों, वहां से मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट करें. इस घटनाक्रम के बाद कल्याण-डोंबिवली की राजनीति में एक बार फिर राजनीति गरमाने की संभावना हैं और पूरे मामले पर सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं.
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मेयर पद की गठजोड़ जारी
हाली में हुए कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के चुनाव में महायुति (बीजेपी-शिवसेना) गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है. 122 सीटों वाली निकाय में शिवसेना (एकनाथ गुट) को 53 सीटें और बीजेपी को 50 सीटों पर जीत मिली है. वहीं दूसरी ओर शिवसेना (UBT) के 11 नगरसेवक चुनाव जीते हैं और राज ठाकरे की पार्टी (MNS) को 5 सीटें मिली हैं. जबकि किसी भी पार्टी को अपना मेयर चुनने के लिए 62 पार्षदों की जरूरत है.
इस घटनाक्रम से पहले दो धुर-विरोधी पार्टीयों, शिवसेना (शिंदे गुट) और MNS ने गठबंधन कर सबको चौंका दिया था. हालांकि राजनीतिक पड़ितों का मानना है कि शिवसेना (UBT) के चार पार्षदों का गायब होना महज एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसमें कहीं न कहीं सियासी गठजोड़ की राजनीति भी शामिल है.
-भारत एक्सप्रेस
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