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“मन करता है यहीं बस जाऊं…” महाकाल के दर्शन के बाद भावुक हुए कपिल देव, बच्चों संग जमकर खेला क्रिकेट

निजी दौरे पर उज्जैन पहुंचे पूर्व कप्तान कपिल देव गली में बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते नजर आए. महाकाल दर्शन के दौरान उन्होंने किसी भी तरह का वीआईपी प्रोटोकॉल लेने से इनकार कर दिया.

रिपोर्ट- मनोज भटनागर


उज्जैन, जिसे हम बाबा महाकाल की नगरी के नाम से जानते हैं, वहाँ की गलियों में आज (मंगलवार) को कुछ ऐसा हुआ जिसकी चर्चा अब हर जुबान पर है. सोचिए, आप अपनी गली में दोस्तों के साथ प्लास्टिक की गेंद से क्रिकेट खेल रहे हों और अचानक एक बुजुर्ग आपसे बल्ला मांगकर बैटिंग करने लगे, और बाद में पता चले कि वो कोई और नहीं बल्कि भारत को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले महान कपिल देव थे. जी हां, मंगलवार को धर्मनगरी उज्जैन में बिल्कुल ऐसा ही फिल्मी सा नजारा देखने को मिला.

दरअसल, भारतीय क्रिकेट के सबसे दिग्गज कप्तानों में शुमार कपिल देव अपने पुराने दोस्त सोनी परिवार से मिलने निजी यात्रा पर उज्जैन आए थे. फ्रीगंज इलाके की उन संकरी गलियों से गुजरते वक्त कपिल पाजी की नजर कुछ बच्चों पर पड़ी जो मस्ती में क्रिकेट खेल रहे थे. क्रिकेट जिसके खून में हो, वो खुद को कैसे रोकता? ‘हरियाणा हरिकेन’ के नाम से मशहूर कपिल देव ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल को किनारे रखा और बच्चों के बीच जा पहुंचे.

मजे की बात तो ये रही कि आज की जनरेशन के वो बच्चे पहचान ही नहीं पाए कि उनके सामने क्रिकेट का कितना बड़ा ‘पहाड़’ खड़ा है. वो उन्हें एक आम अंकल समझकर बॉलिंग करते रहे और कपिल पाजी भी उसी पुराने जोश में शॉट लगाते रहे. जब पास खड़े माता-पिता ने शोर मचाया कि “अरे बच्चों, ये तो महान कपिल देव हैं!”, तब जाकर बच्चों की आंखें फटी की फटी रह गई.

कपिल देव ने जीता भक्तों का दिल

कपिल देव की इस यात्रा ने वीआईपी कल्चर के दौर में एक नई मिसाल पेश की है. अक्सर देखा जाता है कि बड़े सितारे जब उज्जैन आते हैं, तो पुलिस और सुरक्षा का भारी लाम-लश्कर साथ चलता है. लेकिन कपिल ने साफ कर दिया कि वो यहां किसी ‘सेलिब्रिटी’ की तरह नहीं, बल्कि एक साधारण भक्त और दोस्त की तरह आए हैं.

महाकालेश्वर मंदिर में भारी भीड़ को देखते हुए उन्होंने किसी भी तरह का स्पेशल प्रोटोकॉल लेने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि उनकी वजह से आम श्रद्धालुओं को लाइन में कोई दिक्कत हो. बाबा महाकाल के दर्शन के बाद उनके चेहरे पर जो सुकून था, वो देखने लायक था.

“मन करता है यहीं बस जाऊं”

मीडिया से बातचीत के दौरान कपिल देव थोड़े भावुक भी नजर आए. उन्होंने कहा, “मैं देश-दुनिया के कोने-कोने में घूमा हूं, काम का दबाव भी बहुत रहता है, लेकिन उज्जैन की इस मिट्टी में जो शांति है, वो और कहीं नहीं मिलती. यहां आकर मन को जो सुकून मिलता है, उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता. सच कहूं तो मन करता है यहीं बस जाऊं.”

कपिल देव का ये अंदाज सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है. लोग कह रहे हैं कि असली ‘लीजेंड’ वही होता है जो अपनी जड़ों को न भूले और जिसमें इतनी सादगी हो कि वो गली के बच्चों के साथ भी बच्चा बन जाए.

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-भारत एक्सप्रेस



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