कर्नाटक की राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. राज्यपाल का पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री के साथ यह उनकी पहली मुलाकात थी. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी को एक स्मृति चिह्न भी भेंट किया. इस मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए साझा की.
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद डॉ. सुधा यादव ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात की. राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर भी इस मुलाकात की जानकारी दी गई. राज्यपाल बनने के बाद दिल्ली का उनका यह पहला आधिकारिक दौरा था, जिसके दौरान उन्होंने देश के शीर्ष नेतृत्व से शिष्टाचार भेंट की.
अक्टूबर में संभाली थी राज्यपाल की जिम्मेदारी
डॉ. सुधा यादव को 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया था. इसके चार दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने राज्यपाल पद की शपथ ली और अपनी नई जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से उनकी मुलाकात को उनके शुरुआती आधिकारिक कार्यक्रमों का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
कारगिल युद्ध में पति को खोने के बाद राजनीति में रखा कदम
डॉ. सुधा यादव की जिंदगी की कहानी केवल राजनीति तक सीमित नहीं है. उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत एक बड़े व्यक्तिगत दुख के बाद हुई. उनके पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल (BSF) में उप कमान अधिकारी थे. वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वह शहीद हो गए थे. पति को खोने के बाद सुधा यादव ने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई.
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जुड़कर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हरियाणा की महेंद्रगढ़ सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद वह 2004 तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती रहीं. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई और पार्टी के भीतर भी अहम भूमिका निभाई.
भाजपा से लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग तक निभाईं अहम जिम्मेदारियां
सुधा यादव भाजपा की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं. इसके अलावा, उन्होंने पार्टी के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) मोर्चा का नेतृत्व भी किया. संगठन में काम करने के उनके अनुभव ने उन्हें पार्टी के विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दिया.
वर्ष 2019 से 2022 तक वह राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की सदस्य रहीं. इसके बाद अगस्त 2022 में उन्हें भाजपा के संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया. यह पार्टी का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जहां संगठन और राजनीतिक रणनीति से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं.
राजनीतिक जीवन के साथ-साथ डॉ. सुधा यादव की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी उल्लेखनीय है. उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय, जिसे आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के नाम से जाना जाता है, से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है.
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