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विवादों के बीच कर्नाटक में RSS को हाईकोर्ट की हरी झंडी, चित्तपुर में निकालेगी शताब्दी पदयात्रा… दलित संगठन ने भी इसी दिन मांगी जुलूस की अनुमति

RSS ने सोमवार को कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के कमिश्नर को एक नया आवेदन दिया है, जिसमें कर्नाटक होईकोर्ट के निर्देश के बाद 2 नवंबर को चित्तपुर शहर में अपनी शताब्दी पदयात्रा आयोजित करने की अनुमति मांगी गई है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने सोमवार को कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के कमिश्नर को एक नया आवेदन दिया है, जिसमें कर्नाटक होईकोर्ट के निर्देश के बाद 2 नवंबर को चित्तपुर शहर में अपनी शताब्दी पदयात्रा आयोजित करने की अनुमति मांगी गई है. वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट ने शताब्दी यात्रा की अनुमति दे दी है.

चित्तपुर का प्रतिनिधित्व राज्य के ग्रामीण विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खड़गे कर रहे हैं, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र भी हैं. कमिश्नर के न उपलब्ध होने का हवाला देते हुए, आरएसएस प्रतिनिधिमंडल व्यक्तिगत रूप से याचिका प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन भेजा.

राज्य सरकार को आवेदन पर विचार करने का निर्देश

RSS पदाधिकारी अशोक वी पाटिल ने औपचारिक आवेदन में हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर कार्यालय और कमिश्नर के आधिकारिक आवास पर जाने के बावजूद उन्हें आवेदन जमा करने का मौका नहीं मिला.

कर्नाटक हाईकोर्ट की कलबुर्गी पीठ ने आरएसएस को 2 नवंबर को चित्तपुर में पदयात्रा आयोजित करने की अनुमति दी है. कोर्ट ने आयोजकों को नया आवेदन दाखिल करने और राज्य सरकार को उस पर विचार करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को होगी.

यह याचिका आरएसएस नेता अशोक पाटिल ने अधिकारियों की ओर से पहले अनुमति देने से इनकार करने को चुनौती देते हुए दायर की थी. न्यायमूर्ति एमजीएस कमल की पीठ ने इस पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता के वकील अरुण श्याम ने बताया कि आवेदन पहले पुलिस और फिर कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिया गया था, लेकिन 19 अक्टूबर को खारिज कर दिया गया.

भीम आर्मी और दलित पैंथर्स भी इसी दिन मांगी जुलूस की अनुमति

सरकार के वकील ने कानून-व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देते हुए इनकार को उचित ठहराया, क्योंकि भीम आर्मी और दलित पैंथर्स जैसे संगठनों ने भी उसी दिन जुलूस की अनुमति मांगी थी. इस पर उच्च न्यायालय ने सरकार को विभिन्न जुलूसों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित करने का निर्देश दिया था और यह भी कहा था कि आरएसएस ने बिना किसी अप्रिय घटना के राज्य भर में 250 स्थानों पर पैदल मार्च निकाले थे.

इससे पहले, 19 अक्टूबर को होने वाली पदयात्रा के लिए अधिकारियों ने चित्तपुर में लगाए गए भगवा झंडे, बैनर और पताकाएं हटा दी थीं. प्रियांक खड़गे के पत्र के बाद, निजी संगठनों द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया गया था.


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-भारत एक्सप्रेस



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