Sanskrit Cricket Match Kashi: काशी की धरती पर खेल और संस्कृति का एक अनोखा संगम देखने को मिला है. दरअसल रामापुरा स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 82वें स्थापना दिवस पर ‘संस्कृत बटुक क्रिकेट प्रतियोगिता’ का आयोजन हुआ. इसमें वेदपाठी बटुकों ने धोती-कुर्ता और तिलक-त्रिपुंड लगाकर क्रिकेट खेला. तो मैच की कमेंट्री शुद्ध संस्कृत में की गई. जब कमेंटेटर ने संस्कृत में बाउंड्री लगने के बाद खिलाड़ी का उत्साह वर्धन किया तो पूरा मैदान दर्शकों की तालियों से गूंज उठा. इस अनोखे मैच का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वहीं बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले ‘मन की बात’ में ऐसी संस्कृत कमेंट्री की सराहना कर चुके हैं.
पारंपरिक वेशभूषा में जमा क्रिकेट का रंग
मंगलवार को जयनारायण इंटर कॉलेज के मैदान पर यह आयोजन हुआ. इस अनोखे मैच में खिलाड़ी जर्सी-पैंट की जगह धोती-कुर्ता पहनकर मैदान में उतरे. टीका-त्रिपुंड और पारंपरिक पोशाक में वे जिस चपलता से डाइव लगाते और रन चुराते दिखे, वह देखकर दर्शक हैरान रह गए. यह टूर्नामेंट चार टीमों के बीच खेला गया जिसमें शास्त्रार्थ महाविद्यालय, इंटरनेशनल चंद्रमौली चेरिटेबल ट्रस्ट, स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ और चिदानंद संस्कृत विद्यालय की टीमें शामिल थीं.
Varanasi, Uttar Pradesh: Students wearing dhoti-kurta played a cricket match, with commentary delivered in Sanskrit pic.twitter.com/WboKiFffYf
— IANS (@ians_india) January 27, 2026
संस्कृत कमेंट्री का जादू सिर चढ़ कर बोला
कमेंट्री करने वाले व्याकरण शास्त्र के विद्वान डॉ. शेषनारायण मिश्र और वेद आचार्य विकास दीक्षित ने संस्कृत में पूरे मैच का वर्णन किया. पुल शॉट, कवर ड्राइव, विकेट गिरना, रन आउट- हर घटना को संस्कृत के शब्दों में इतने जीवंत ढंग से बताया गया कि मैदान पर मौजूद हर व्यक्ति संस्कृत की जीवंतता महसूस कर सका. यह आयोजन साबित करता है कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं, बल्कि खेल-कूद और आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक हो सकती है.
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फाइनल में वेदांती विद्यापीठ ने जीता खिताब
फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा जिसमें स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ ने इंटरनेशनल चंद्रमौली ट्रस्ट को 8 विकेट से हराकर खिताब अपने नाम किया. खिलाड़ियों ने पारंपरिक वेशभूषा में जिस जोश और कौशल से खेला, वह देखने लायक था. बताते चलें कि यह प्रतियोगिता न केवल क्रिकेट के प्रति उत्साह जगाती है, बल्कि प्राचीन संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने का बेहतरीन माध्यम भी साबित हो रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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