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दिल की बात आसानी से कहना है तो क्या करें? Bazm-e-Sahafat में किरेन रिजिजू ने बताया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘भारत एक्सप्रेस’ के उर्दू कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफत’ में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा कि उर्दू किसी एक धर्म की नहीं बल्कि हिंदुस्तानी जुबान है. साथ ही उन्होंने इसे दिल का बात कहने के लिए जरूरी बताया.

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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘भारत एक्सप्रेस’ के उर्दू कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफत’ (Bazm-e-Sahafat) में शिरकत करते हुए उर्दू भाषा को लेकर बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक विचार रखे हैं. उन्होंने कहा कि उर्दू किसी एक धर्म या एक देश की जुबान नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से हिंदुस्तानी जुबान है.

उर्दू सीखने वाला अमीर होता है- किरेन रिजिजू

कॉन्क्लेव के दौरान उर्दू पत्रकारिता और भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उर्दू एक ऐसी समृद्ध भाषा (Rich Language) है, जिसे जिसने भी सीख लिया, समझिए वह वैचारिक रूप से बेहद अमीर हो गया. उन्होंने कहा कि यह केवल खास लोगों की नहीं, बल्कि आम लोगों की जुबान भी होनी चाहिए.

अभिव्यक्ति की ताकत: किरेन रिजिजू ने कहा कि जिस व्यक्ति ने उर्दू में महारत हासिल कर ली, वह अपने दिल की बात को बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ बयान कर पाएगा.

अंदाज-ए-बयां: उर्दू भाषा की खासियत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस जुबान को बोलने का अंदाज और इसे बोलने वाले का लहजा अपने आप में बेहद खास होता है.

युवाओं को कनेक्ट करने की जरूरत

भाषा के विस्तार और उसके भविष्य को लेकर चिंता और उम्मीद जताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उर्दू के और अधिक विस्तार के लिए आज के युवाओं को इस भाषा के साथ जोड़ना होगा. हालांकि, उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी जोड़ा कि आजकल के युवा सोशल मीडिया में ज्यादा व्यस्त रहते हैं और आसानी से बड़ों की बात नहीं सुनते, इसलिए उन्हें उनकी ही दुनिया में जाकर प्रेरित करना होगा. अंत में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उर्दू अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल लैंग्वेज बन चुकी है.

सीएमडी उपेंद्र राय के नेतृत्व में उर्दू सहाफ़त को नया आयाम

भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के सीएमडी और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित यह कॉन्क्लेव उर्दू पत्रकारिता को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की एक बड़ी पहल है. उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता उपेंद्र राय ने अपना संबोधन पेश करते हुए देश के लोकतांत्रिक ढांचे में निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित किया.

दीप प्रज्वलन और उद्घाटन सत्र के बाद अब दिनभर विभिन्न सत्रों में ‘राष्ट्र निर्माण में उर्दू पत्रकारिता की भूमिका’ और ‘राजनीतिक संवाद में उर्दू’ जैसे विषयों पर देश के प्रमुख सांसद, संपादक और बुद्धिजीवी मंथन करेंगे.



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