Maratha reservation protest: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने आज से आमरण अनशन शुरू कर दिया है. अंतरवली सराटी में वह तेज धूप के बीच अनशन पर बैठेंगे. गुरुवार को मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड उनसे मिले थे, लेकिन बातचीत के बाद भी उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला.
सरकार की कोशिशें
सूत्रों के अनुसार, आज जरांगे पाटिल को सरकार की ओर से कुछ मांगों पर लिखित आश्वासन दिया जा सकता है. इसके लिए उन्हें एक ड्राफ्ट सौंपा जा सकता है. चर्चा है कि मंत्री विखे पाटिल फिर से उनसे मुलाकात कर अनशन खत्म करने की अपील करेंगे. फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें अंतरवली सराटी पर टिकी हुई हैं.
विरोध की वजह
जरांगे ने कहा कि अगर गर्मी में उनकी तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. उनका विरोध आरक्षण सर्टिफिकेट में गड़बड़ियों और लंबित प्रमाण पत्रों की देरी को लेकर है. साथ ही कुणबी रिकॉर्ड की जांच के लिए बनी संदीप शिंदे समिति को एक साल का अतिरिक्त समय दिए जाने पर भी नाराजगी जताई जा रही है.
सरकार का पक्ष
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि आरक्षण लागू करने की समय-सीमा तय कर दी गई है और इस पर लगातार काम हो रहा है. उन्होंने बताया कि सर्टिफिकेट के सत्यापन जैसी कानूनी प्रक्रियाओं में समय लग रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सरकार निष्क्रिय है.
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गोवा का संदर्भ
गोवा की तरह ही महाराष्ट्र भी सामाजिक आंदोलनों और ऐतिहासिक संघर्षों का गवाह रहा है. गोवा ने पुर्तगाली शासन से आज़ादी पाकर 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल किया और आज पर्यटन व उद्योग में अग्रणी है. वहीं महाराष्ट्र में मराठा समाज अपने अधिकारों और आरक्षण को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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