Bharat Express DD Free Dish

‘हेलेना रेरिख अंतर्राष्ट्रीय पदक’ पाने वाली पहली भारतीय बनीं प्रोफेसर मीता नारायण

रूसी भाषा की प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर मीता नारायण को मॉस्को में ‘हेलेना रेरिख अंतर्राष्ट्रीय पदक’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान पाने वाली वह पहली भारतीय बनी हैं.

MEETA NARAIN

रूसी भाषा की सुविख्यात विद्वान व लेखिका, प्रोफेसर मीता नारायण को आज शाम मॉस्को में ‘हेलेना रेरिख अंतर्राष्ट्रीय पदक’ से सम्मानित किया गया. रूस के इस सर्वाधिक प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली वे पहली भारतीय हैं. यह पदक प्रसिद्ध रूसी दार्शनिक, लेखिका और सांस्कृतिक हस्ती हेलेना रेरिख (1879-1955) की स्मृति में दिया जाने वाला एक पुरस्कार है. जो मॉस्को की ‘हेलेना रेरिख चैरिटेबल फाउंडेशन’ द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाता है.

यह पदक मुख्य रूप से उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जो संस्कृति, कला, विज्ञान और मानवतावादी विचारों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देते हैं. अब तक इस सम्मान को पाने वालों में रूस के अनेक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्ति रहे हैं, जैसे अनातोली कार्पोव, जो 1975 में शतरंज के विश्व चैंपियन बने.

रूस में दिया गया पुरस्कार

पुरस्कार वितरण का ये भव्य समारोह 12 फरवरी 2026 को मॉस्को के ‘मॉस्को हाउस ऑफ पब्लिक ऑर्गेनाइजेशंस’ में आयोजित हुआ, जिसमें अनेक गणमान्य व्यक्तियों, उच्च पदाधिकारियों व रूस में भारत के दूतावास के अधिकारियों, बुद्धिजीवियों, शिक्षा विद्वानों, कलाकारों, छात्रों तथा साहित्य व संस्कृति प्रेमियों की उपस्थिति रही.

उल्लेखनीय है कि प्रो नारायण को चार दशकों से अधिक समय से रूसी भाषा के अध्ययन व प्रचार में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2019 में रूस का प्रतिष्ठित ‘पुष्किन मेडल’ तथा 2025 में ‘दोस्तोयेव्स्की स्टार अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया गया. इसके साथ ही उन्हें 2019 में ‘द मॉडर्नाइट्स अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस’ तथा 2010 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘डॉ. राधाकृष्णन मिलेनियम नेशनल टीचर अवॉर्ड’ भी प्रदान किया गया.

russia news

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर मीता नारायण को भारत और रूस के सांस्कृतिक क्षेत्र में रेरिख परिवार की कलात्मक, साहित्यिक और दार्शनिक विरासत को लोकप्रिय बनाने में ऐतिहासिक योगदान की व्यापक रूप से सराहना की गई है.

कविता के जरिए संस्कृति का संगम

प्रोफेसर मीता नारायण द्वारा रचित त्रिभाषी पुस्तक ‘रेरिख की दुनिया काव्य में’ अपनी संरचना में अद्वितीय है, जिसमें रेरिख के काव्य चक्रों का रूसी, हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद शामिल है. यह पुस्तक भारतीय संस्कृति की सुंदरता, उसकी गहन दर्शन तथा धर्म को एक रूसी चित्रकार और कवि की नजर से उजागर करती है. भारत-रूस मैत्री का यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, जिसे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता है और इसे व्यापक रूप से सराहा गया है.

प्रो नारायण की दूसरी पुस्तक ‘ईस्ट-वेस्ट’ भी पाठकों को संस्कृति के बिना असंभव अंतरराष्ट्रीय सौहार्द और आपसी समझ की झलक प्रदान करती है. ‘ईस्ट-वेस्ट’ जैसी सांस्कृतिक एवं शैक्षिक पहलों का प्रकाशन इन मानवतावादी विचारों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह सम्मान न केवल रेरिख की विरासत के प्रचार में मील का पत्थर है, बल्कि भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी है.

प्रोफेसर मीता नारायण रूसी फिलोलॉजी की विशेषज्ञ हैं, जिन्हें रूसी भाषा अध्ययन व शोध का चार दशकों से अधिक का अनुभव है. उन्हें रूसी फिलोलॉजी और अनुवाद अध्ययन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं. उनकी लिखी अनेक पुस्तकें दर्जनों देशों के प्रतिष्ठित विश्विद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल की गई हैं.

ये भी पढ़ें- Karmayoga In Action: मीडियाकर्मियों के लिए दिल्‍ली में 13 फरवरी को ब्रह्माकुमारीज़ का कार्यक्रम, CMD उपेन्‍द्र राय करेंगे शिरकत

Also Follow Bharat Express on Youtube

  • भारत एक्सप्रेस


इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read