नागापट्टिनम (तमिलनाडु): देश में सांप्रदायिक सौहार्द और साझा विरासत की एक दिल छू लेने वाली मिसाल तमिलनाडु के तटीय जिले नागापट्टिनम से सामने आई है. यहां स्थित प्रसिद्ध हजरत सैयद शाहुल हमीद की नागौर दरगाह (Nagore Dargah) परिसर में एक हिंदू जोड़े ने पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों, मंगलसूत्र और सात वचनों के साथ विवाह रचाया. इस मांगलिक अवसर पर दरगाह कमेटी और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न सिर्फ शादी में शिरकत की, बल्कि दूल्हा-दुल्हन पर अक्षत (चावल) और फूल बरसाकर उन्हें आशीर्वाद भी दिया.
परंपरा और आस्था का अनूठा संगम
नागौर दरगाह करीब 500 वर्षों से सभी धर्मों के लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र रही है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं में हिंदू और मुस्लिम दोनों की गहरी आस्था है. दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजनों की नागौर शरीफ के प्रति गहरी श्रद्धा थी, जिसके चलते उन्होंने अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत इसी पवित्र स्थल से करने की इच्छा जताई थी. दरगाह प्रबंधन ने परिजनों की इस प्रार्थना को सहर्ष स्वीकार किया और परिसर में विवाह संपन्न कराने के लिए समुचित व्यवस्था की.
मुस्लिमों ने निभाई मेजबानी, बरसाए अक्षत
विवाह के दौरान जब वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक वाद्ययंत्रों (नादस्वरम) की ध्वनि के बीच रस्में निभाई जा रही थीं, तब वहां मौजूद मुस्लिम समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने दोनों परिवारों का स्वागत किया. विवाह संपन्न होने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पारंपरिक हिंदू विधि के अनुसार नवदंपति पर अक्षत और पुष्प वर्षा की.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन तमिलनाडु की उस साझा संस्कृति का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जहां सदियों से लोग धर्म और मजहब की दीवारें तोड़कर एक-दूसरे के सुख-दुख और उत्सवों में शामिल होते रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इस विवाह की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इस गंगा-जमुनी तहजीब की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं.
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