बिहार के सीएम नीतीश कुमार.
संवाददाता-आशुतोष कुमार, पटना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राष्ट्रगान के दौरान किया गया व्यवहार बिहार विधानसभा में बड़ा विवाद बन गया है. यह मामला उस समय और बढ़ गया जब विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया. विधानसभा सत्र शुरू होते ही आरजेडी ने तिरंगे के साथ नीतीश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया, साथ ही उन्होंने माफी और इस्तीफे की मांग की. इस बीच, नीतीश कुमार के बचाव में एनडीए के कुछ नेता भी सामने आए और उनकी उपलब्धियों का बखान किया.
विपक्ष का तीखा हमला और राबड़ी देवी का धरना
राष्ट्रगान के दौरान नीतीश कुमार की तस्वीर को आरजेडी ने मुद्दा बना लिया और महागठबंधन के विधायक हाथों में तिरंगा लेकर विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन करने लगे. इस दौरान, उन्होंने नीतीश कुमार पर “मानसिक दिवालियापन” का आरोप लगाया और उनसे माफी मांगने के साथ ही इस्तीफे की मांग की. इस पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी नीतीश कुमार के मानसिक हालात पर सवाल उठाए और उन्हें इस्तीफा देने की अपील की.
विधान परिषद में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी अपने विधायकों के साथ प्रदर्शन किया और नीतीश कुमार पर मानसिक दिवालियापन का आरोप लगाया. राबड़ी देवी ने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं तो उन्हें अपने बेटे को सत्ता सौंप देनी चाहिए.
एनडीए नेताओं का बचाव
इस मुद्दे पर एनडीए नेताओं को जवाब देने में कठिनाई हो रही थी, लेकिन आखिरकार जेडीयू विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार और बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने मोर्चा संभाला. दोनों नेताओं ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि जो लोग राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर नहीं समझते, उन्हें इस प्रकार के आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है. नीरज कुमार ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का पूरा परिवार स्वतंत्रता सेनानी रहा है, जबकि आरोप लगाने वाले नेताओं के परिवार का स्वतंत्रता आंदोलन से कोई वास्ता नहीं है.
राष्ट्रगान के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हरकत को लेकर बिहार विधानसभा में राजनीति गरमा गई है. विपक्ष ने आरोप लगाए हैं, जबकि एनडीए नेताओं ने अपनी सफाई दी है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले पर आगे और क्या घटनाक्रम सामने आते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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