नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ. इस आयोजन को श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (SPMRF) और पीपीआरसी (PPRC) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था.
इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय तीन रूपों में अद्वितीय थे— विचारक, संगठनकर्ता और नेता. उन्होंने बताया कि स्वयं संघ के पूज्य गुरुजी कहते थे, “अगर मुझे चार दीनदयाल मिल जाएं, तो मैं देश को बदल सकता हूं.” नड्डा ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की बात करते हैं, तो वह दरअसल दीनदयाल जी के अंत्योदय दर्शन को ही आगे बढ़ा रहे हैं.
मोदी सरकार में रक्षा उत्पादन 1.3 लाख करोड़ तक पहुंचा
नड्डा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने केवल विचार नहीं दिए, बल्कि संगठन खड़ा किया और राष्ट्रीय पार्टी के रूप में जनसंघ की नींव रखी. आज उन्हीं की प्रेरणा से भारत आत्मनिर्भर बन रहा है — रक्षा उत्पादन 1.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, 70,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हो रहा है और 97% मोबाइल भारत में बन रहे हैं. उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि मोदी सरकार की योजनाओं के कारण 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं, 4 करोड़ से अधिक घर बने हैं, 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला है और 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है. यह सब अंत्योदय के दर्शन का परिणाम है.
आठ सत्रों में एकात्म मानववाद पर गहन विमर्श हुआ
उपरोक्त कार्यक्रम में देशभर से आए 550 से अधिक विद्वानों ने भाग लिया और आठ सत्रों में एकात्म मानववाद पर गहन विमर्श हुआ. इस दौरान आठ नई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया. ‘दीनदयाल ग्राम’ के रूप में सजे कार्यक्रम स्थल पर लगी 3D डिजिटल प्रदर्शनी, LED डिस्प्ले, 360° डिजिटल ग्लोब और इंटरएक्टिव पैनल ने लगभग 15,000 दर्शकों को आकर्षित किया.
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता व विचारक मौजूद रहे
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई, डॉ. गुरु प्रकाश पासवान, डॉ. अल्का गुर्जर, बी.एल. संतोष, वी. सतीश, वीरेंद्र सचदेवा और कई वरिष्ठ नेता व विचारक मौजूद रहे. कार्यक्रम का संचालन पीपीआरसी निदेशक सुमित भसीन ने किया जबकि एसपीएमआरएफ के निदेशक डॉ. अनिर्बान गांगुली, राजीव बब्बर व अन्य लोगों ने आयोजन को सफल बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई.
यह संगोष्ठी केवल एक वैचारिक मंच नहीं थी, बल्कि यह प्रमाण थी कि भारतीय विचारधारा आज भी जीवंत, प्रासंगिक और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में अग्रसर है.
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